पंजाबी यूनिवर्सिटी में सार्थक रंगमंच और सोशल वेलफेयर सोसाइटी के सहयोग से युवक भलाई विभाग व एनजेडसीसी की ओर से 11वें नोरा रिचर्ड्स थिएटर फेस्टिवल का आयोजन किया गया है। इसके पहले दिन कामता नाथ की कहानी पर आधारित नाटक पीढ़ी दर पीढ़ी का मंचन किया गया। इसे पंजाबी थियेटर और फिल्म कलाकार डॉ. लक्खा लहरी ने निर्देशित किया।
कला भवन ऑडिटोरियम के खचाखच भरे हॉल में मंचित इस नाटक ने दर्शकों ने काफी प्रभावित किया। दर्शकों ने तालियां बजाकर नाटक के कलाकार करमन सिद्धू के अभिनय की सराहना की। नाटक पीढ़ी दर पीढ़ी में दिखाया गया कि घरेलू जिंदगी में छोटी-छोटी बातें भी कभी-कभी बड़ी हो जाती हैं। नाटक की कहानी एक पिता, बेटे और मां के इर्द-गिर्द घूमती है। हर पिता को अक्सर अपने बच्चों और परिवार से कई तरह की शिकायतें और शिकवे होते हैं। इसी तरह बेटे को भी अपने पिता से शिकायतें होती हैं। वे दोनों अपनी शिकायतें और शिकवे दर्शकों के सामने रखते हैं और इतने भरोसे के साथ अपना पक्ष बताते हैं कि बाहर से दोनों ही सही लगते हैं। जब मां उन दोनों के बारे में बताती है, तो पूरी स्थिति बदल जाती है क्योंकि वह दोनों को अपने नजरिये से देखती है।
मनप्रीत सिंह और उत्तम दराल ने नाटक के मूड को बेहतर बनाने के लिए लाइटिंग का शानदार काम किया। नाटक का म्यूजिक करमन सिद्धू ने तैयार किया और कुंवरजीत सिंह ने संचालन किया। नाटक देखने के बाद वाइस चांसलर प्रो. जगदीप सिंह ने नाटक की तारीफ की और कहा कि यह नाटक आज के समय की सच्चाई है। फेस्टिवल डायरेक्टर डॉ. इंद्रजीत गोल्डी ने मंच संचालन किया और पंजाबी थियेटर में नोरा रिचर्ड्स के महान योगदान पर प्रकाश डाला। इससे पहले सुबह के रूबरू कार्यक्रम में मशहूर फिल्म कलाकार गुरप्रीत घुग्गी ने अपने सफर और संघर्ष के अनुभव शेयर किए। उन्होंने बच्चों के सवालों के जवाब दिए और उनकी हिम्मत बढ़ाई और आखिर में युवा कवि प्रीत कारखल की किताब मोहब्बत मुक्कलम नई होई का विमोचन किया गया।
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