झारखंड में 108 एंबुलेंस सेवा जल्द ही ओला और अन्य निजी कंपनियों की तरह आधुनिक तकनीक पर आधारित मॉडल के तहत संचालित होगी। स्वास्थ्य, चिकित्सा शिक्षा और परिवार कल्याण विभाग के अपर मुख्य सचिव अजय कुमार सिंह की अध्यक्षता में शुक्रवार को हुई बैठक में इस योजना की रूपरेखा पर चर्चा हुई। बैठक में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के अपर सचिव विद्यानंद शर्मा पंकज, निदेशक प्रमुख डॉ. सिद्धार्थ सान्याल, उप सचिव ध्रुव प्रसाद और कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे। नई व्यवस्था में एंबुलेंस सेवा पूरी तरह निःशुल्क होगी और मरीज किसी भी सरकारी या निजी अस्पताल के लिए इसे बुक कर सकेंगे। अपर मुख्य सचिव ने बताया कि इसके लिए विशेष सॉफ्टवेयर विकसित किया जा रहा है, जो एंबुलेंस और कॉल सेंटर को जोड़ देगा। नई एंबुलेंस में जीपीएस, एमडीटी डिवाइस और अन्य आधुनिक सुविधाएं होंगी। ड्राइवरों की बायोमेट्रिक अटेंडेंस होगी, समय पर पहुंचने पर एजेंसी को इंसेंटिव और देरी होने पर पेनल्टी दी जाएगी। पैरा-स्टाफ की कमी होगी दूर टेक्निकल पैरामेडिकल स्टाफ की कमी पर चर्चा की गई। जिला से लेकर पंचायत स्तर के अस्पतालों में स्टाफ की कमी को देखते हुए आउटसोर्सिंग के माध्यम से पैरामेडिकल कर्मियों की नियुक्ति का निर्णय लिया गया। इसके लिए आरएफपी पर विचार किया गया और जल्द ही राज्य में यह व्यवस्था लागू होने की संभावना है।
पीपीपी मोड पर उपलब्ध होंगी पैथोलॉजी- रेडियोलॉजी सेवाएं बैठक में पीपीपी मोड पर पैथोलॉजी एवं रेडियोलॉजी सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए आरएफपी पर भी चर्चा हुई। ये सुविधाएं जिला अस्पतालों और अनुमंडलीय अस्पतालों में उपलब्ध कराई जाएंगी। आम जनता को सीजीएचएस दर पर सभी जांच सुविधाएं मिलेंगी, जिससे इलाज सस्ता और सुलभ होगा। अपर मुख्य सचिव ने बताया कि एजेंसी को पहले 5 वर्षों के लिए और बेहतर प्रदर्शन की स्थिति में 3 वर्षों के लिए विस्तार दिया जाएगा।
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