पंजाब में सात साल बाद जिला परिषद व पंचायत समिति के चुनाव हो रहे हैं। साल 2018 के चुनाव में कांग्रेस को अच्छी बढ़ती मिली थी और शिअद दूसरे नंबर पर था। आप ने यह चुनाव नहीं लड़ा था। कांग्रेस अब दोबारा अपना वही प्रदर्शन दोहराते हुए पंजाब के ग्रामीण इलाकों में अपनी पकड़ को और मजबूत करना चाहती है मगर इसके लिए कड़ी चुनौती है मौजूदा गुटबाजी के भंवर से उभरकर एकजुटता के साथ सियासी विरोधियों से लड़ना।
इन सात वर्षों में जहां शिअद ने भी अपनी पंथक राजनीति के जरिये ग्रामीण मतदाताओं के बीच पैठ बढ़ाई है वहीं इन चुनाव में आप की एंट्री के बाद यह मुकाबला और कड़ा हो गया है। भाजपा की बात करें तो इस पार्टी का वोट शेयर भी बढ़ा है।
इन चुनाव के मद्देनजर जिला परिषद की 298 सीटों पर और पंचायत समिति की 2700 सीटों पर कांग्रेस के प्रत्याशी मैदान में हैं। कांग्रेस ने सभी जिलों में अध्यक्षों की नियुक्ति हाल ही में की है और इन्हीं को अपने-अपने जिलों में चुनाव जितवाने की जिम्मेदारी सौंपी गई है। पंजाब कांग्रेस के बड़े नेता भी गांव-गांव जाकर चुनाव प्रचार में व्यस्त रहे।
इसी बीच पंजाब कांग्रेस को सबसे ज्यादा दिक्कत चुनावों के दाैरान अचानक मुखर हुई गुटबाजी के चलते झेलनी पड़ी। कांग्रेस की वरिष्ठ नेत्री नवजोत कौर के बिगड़े बोलों ने न केवल पंजाब कांग्रेस को नुकसान पहुंचाया बल्कि उन्होंने चुनाव में सियासी विरोधियों को पार्टी के खिलाफ अच्छा खासा मुद्दा थमा दिया। सीएम सीट से लेकर विभिन्न सीटों पर टिकट पाने के लिए रेट तय होने की बात कहकर उन्होंने पार्टी में खलबली मचा दी। भले ही पार्टी ने उन्हें निलंबित कर दिया मगर चुनाव के दौरान उनके इस बयान को विरोधियों ने खूब उछाला।
दूसरी ओर देखें तो इस वक्त विधानसभा में कांग्रेस ही सबसे बड़ा दल है और पार्टी ने अपना पूरा फोकस फरवरी 2027 में प्रस्तावित विधानसभा चुनाव पर किया हुआ है। लिहाजा कांग्रेसी नेता इन चुनाव में अधिक से अधिक सीटें जीतकर ग्रामीण मतदाताओं को अपने पाले में करने की कोशिशों में जुटे हैं। इस बात से भी इन्कार नहीं किया जा सकता कि यदि गुटबाजी छोड़ सूबे के सभी वरिष्ठ कांग्रेसी नेता एकजुट हो जाएं तो विरोधी दलों को अच्छी टक्कर दे सकते हैं।
हमने ग्रामीणों से जुड़े मुद्दे उठाए : वड़िंग
पंजाब के लोग अब कांग्रेस को सेवा को मौका देना चाहते हैं। मतदाताओं ने आप सरकार का कार्यकाल देख लिया है और वे शिअद को दोबारा सता सौंपना नहीं चाहते। वे कांग्रेस की विचाराधारा पर विश्वास करते हुए हमारे प्रत्याशियों को जितवाएंगे। हमने गांवों में ग्रामीणों से जुड़े कई मुद्दे उठाए हैं। मतदाताओं को बताया है कि अभी तक सरकार की ओर से महिलाओं को एक हजार रुपये प्रतिमाह देने का वादा पूरा नहीं हुआ। पंचायतों को विकास के लिए पर्याप्त फंड नहीं मिल रहा है। मनरेगा की दिहाड़ी घटा दी गई जिस वजह से विकास कार्य रुके हैं। गांवों में सड़कों की हालत खराब है। अनियंत्रित कानून-व्यवस्था भी बड़ा मुद्दा है। इन सभी मसलों को ध्यान में रखकर ही ग्रामीण मतदाता इस बार अपना वोट डालेंगे। -अमरिंदर सिंह वड़िंग, अध्यक्ष, पंजाब प्रदेश कांग्रेस कमेटी
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