एचवीपीएन (हरियाणा विद्युत प्रसारण निगम) द्वारा बनाई जा रही 66 केवी बिजली लाइन को लेकर प्रभावित किसानों का विरोध तेज हो गया है। यमुनानगर में आज बुधवार को कई गांवों के किसान भारतीय किसान यूनियन के बैनर तले जिला सचिवालय पहुंचे और डीसी कार्यालय के बाहर नारेबाजी करते हुए मुआवजे से जुड़ी कमेटी में किसानों द्वारा चुने गए प्रतिनिधि को शामिल करने की मांग की। किसानों ने बताया कि एचवीपीएन की ओर से 66 केवी बिजली लाइन बकाना (रादौर) से सेक्टर-18 जगाधरी तक बिछाई जा रही है। इस लाइन से प्रभावित किसान पहले भी प्रशासन से मिलकर अपनी समस्याएं रख चुके हैं, लेकिन अब तक उनकी मांगों पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। किसानों से बगैर राय प्रतिनिधि किया शामिल किसानों का कहना है कि प्रशासन द्वारा मुआवजे के लिए जो कमेटी बनाई जा रही है, उसमें किसानों से राय लिए बिना ही एक व्यक्ति को किसान प्रतिनिधि के तौर पर शामिल कर दिया गया है, जिसे प्रभावित किसान स्वीकार नहीं करते। भाकियू ने नेता सुभाष गुर्जर ने कहा कि हरियाणा सरकार के नोटिफिकेशन के अनुसार जमीन का मार्केट रेट तय करने के लिए एक कमेटी का गठन होना चाहिए, जिसमें प्रशासन का एक अधिकारी, बिजली विभाग का एक अधिकारी, दो वैल्युएर (एक सरकार की ओर से और एक किसान की ओर से) और एक किसान प्रतिनिधि शामिल होना चाहिए, जिसे प्रभावित किसान स्वयं चुनें। 60 प्रतिशत मुआवजा देने की मांग किसानों का आरोप है कि यमुनानगर में प्रशासन ने अपनी मर्जी से इस कमेटी में नाम शामिल कर दिया है। किसानों ने मांग की कि कमेटी में वही किसान प्रतिनिधि शामिल किया जाए जिसे प्रभावित किसान चुनें। इसके साथ ही जिन गांवों में बिजली लाइन का काम पूरा हो चुका है, वहां के किसानों को पहले मुआवजा दिया जाए। किसानों ने यह भी मांग उठाई कि सभी गांवों में बिजली तारों के नीचे आने वाली जमीन का मुआवजा 60 प्रतिशत दिया जाए, क्योंकि सुढल और सुढैल गांव नगर निगम क्षेत्र के साथ लगते हैं और वहां की जमीन काफी महंगी है। किसानों ने चेतावनी देते हुए कहा कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होतीं, तब तक इस बिजली लाइन का काम नहीं होने दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि मांग न मानी जाने पर वे 16 मार्च को सड़क जाम करेंगे। अगर किसानों को किसी प्रकार का नुकसान होता है तो इसकी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी।
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