प्रेस क्लब रांची में ‘शब्दकार’ साहित्यिक समूह की ओर से कवयित्री सुमिता सिन्हा के पहले काव्य संग्रह ‘चांद पिघलता है मुझमें’ का भव्य लोकार्पण किया गया। कार्यक्रम में शहर के साहित्यकारों ने कविता के बदलते स्वरूप और स्त्री मन की अभिव्यक्ति पर गहन विमर्श किया। सबलोग पत्रिका के संपादक और साहित्यकार प्रकाश देवकुलिश ने कहा कि रांची का साहित्य संसार बेहद समृद्ध है। उन्होंने जोर देते हुए कहा, “प्रतिरोध को स्वर देना कवि का दायित्व होता है। सुमिता सिन्हा का यह प्रथम संकलन अपनी विलक्षणता के साथ पाठकों के बीच आया है।’ डॉ. अशोक प्रियदर्शी ने कहा कि ललित कलाओं में कविता सर्वश्रेष्ठ है। सुमिता की कविताओं में प्रेम के विभिन्न रूपों की सहज और सजग अभिव्यक्ति दिखती है। वरिष्ठ कथाकार पंकज मित्र ने कहा कि आज के दौर में जहां नफरत और शोर का माहौल है, वहां एक स्त्री का प्रेम पर कविता लिखना ही सबसे बड़ा प्रतिकार (प्रतिरोध) है। इनकी कविताओं में स्त्री आवाज को नई दिशा दी गई है। सारी कविताएं मौजूं हैं और सभी को पसंद आएंगी। साहित्यकार उर्वशी ने कहा कि यह संग्रह आत्मा की एक गहन यात्रा है। यहां ‘चांद का पिघलना’ दरअसल स्मृतियों का द्रवित होना है। शब्दकार की अध्यक्ष रश्मि शर्मा ने कहा कि इनकी कविताओं का मूल स्वर प्रेम है, जो स्त्री मन के भूगोल की परिक्रमा करता है। इन्हें गहराई से महसूस करने की जरूरत है। अपनी रचना प्रक्रिया साझा करते हुए सुमिता सिन्हा भावुक हुईं। उन्होंने कहा, “समय और उम्र ने मुझे जिम्मेदार बनाया। बीते कुछ वर्षों में मेरे बच्चों, मेरी मां और एक मित्र ने मुझे लिखने के लिए लगातार प्रेरित किया, जिसकी परिणति इस किताब के रूप में हुई।’ मुक्ति शाहदेव ने प्रभावी ढंग से मंच संभाला। कथाकार रीता गुप्ता और सोनल थेपड़ा ने संग्रह की चुनिंदा कविताओं का पाठ किया। डॉ. अनामिका प्रिया ने अतिथियों का स्वागत किया और सत्या शर्मा ने धन्यवाद ज्ञापन दिया। कार्यक्रम में संगीता कुजूर टॉक, वीणा श्रीवास्तव, राजीव थेपड़ा, जय माला, प्रमोद कुमार झा, कुमार बृजेन्द्र और शहर के कई गणमान्य लेखक-कवि मौजूद रहे।
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