पिथौरागढ़। जनपद की स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाली का खामियाजा यहां की महिलाओं और गर्भवतियों को भुगतना पड़ रहा है। जिला महिला अस्पताल में तैनात एकमात्र स्थायी महिला रोग विशेषज्ञ (गाइनेकोलॉजिस्ट) के अवकाश पर होने से मरीजों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। अब विशेषज्ञ की पूर्णकालिक सेवाओं के लिए जिले की महिलाओं को कम से कम दो महीने और इंतजार करना होगा।
महिला अस्पताल में विशेषज्ञ डॉक्टरों की भारी कमी बनी हुई है। अस्पताल में महिला रोग विशेषज्ञ के तीन पद स्वीकृत हैं लेकिन स्थायी नियुक्ति केवल एक पर है। इसके बाद भी एकमात्र स्थायी डॉक्टर भी पिछले चार माह से अवकाश पर हैं।
अस्पताल प्रबंधन के अनुसार, स्थायी चिकित्सक का अवकाश जून में समाप्त होगा हालांकि वे मई से सेवाएं देना शुरू कर सकती हैं। वर्तमान में अस्पताल का काम एक अनुबंध पर तैनात डॉक्टर और एक अस्थायी महिला चिकित्सक के सहारे चल रहा है।
150 की ओपीडी और निजी अस्पताल से लेनी पड़ रही मदद
अस्पताल में रोजाना 100 से 150 महिलाओं की ओपीडी होती है। डॉक्टरों की कमी का आलम यह है कि सिजेरियन (ऑपरेशन) और गंभीर रूप से भर्ती मरीजों के इलाज के लिए अस्पताल प्रबंधन को निजी अस्पताल की महिला चिकित्सक की मदद लेनी पड़ रही है। दूरदराज के क्षेत्रों से आने वाली गर्भवतियों को जांच के लिए घंटों अपनी बारी का इंतजार करना पड़ता है।
कोट
– मई-जून माह से स्थायी महिला रोग विशेषज्ञ अस्पताल में सेवाएं देना शुरू कर देंगी। तब तक गर्भवतियों और अन्य मरीजों के उपचार के लिए अनुबंध पर तैनात विशेषज्ञ और वैकल्पिक व्यवस्थाओं का सहारा लिया जा रहा है। – डॉ. भागीरथी गर्ब्याल, पीएमएस, जिला अस्पताल, पिथौरागढ़
Discover more from India News
Subscribe to get the latest posts sent to your email.