रहने का अच्छा इंतजाम हो
पशु धन विकास विभाग के अतिरिक्त उप संचालक डॉ बी आर खंडे ने बताया कि जिले में ठंड का मौसम चल रहा है, जिसका सीधा और गंभीर प्रभाव पशुओं के स्वास्थ्य पर पड़ता है. सर्दी के मौसम में यदि पशुओं की सही देखभाल नहीं की जाए तो न सिर्फ उनकी सेहत बिगड़ती है, बल्कि दूध उत्पादन में भी भारी गिरावट देखने को मिलती है. ऐसे में पशुपालक भाइयों के लिए यह बेहद जरूरी है कि वे अपने पशुओं को ठंड के प्रतिकूल प्रभाव से बचाने के लिए समय रहते पर्याप्त इंतजाम करें.
तापमान सही रहे
उपाय के संबंध में बताया की पशुओं के रहने के स्थान, को छत्तीसगढ़ में आमतौर पर शेड या कोठा कहा जाता है, वहां ठंड से बचाव की समुचित व्यवस्था होनी चाहिए. विशेष रूप से सीधी ठंडी हवा के आवागमन को रोकना बेहद आवश्यक है. इसके लिए कोठा के उन हिस्सों पर, जहां से हवा का संचार होता है, वहां बोरा, पॉलिथीन या अन्य उपलब्ध साधनों का ढक कर उपयोग किया जाना चाहिए, साथ ही कोठे के अंदर यथासंभव तापमान को गर्म बनाए रखने का प्रयास करना चाहिए.
ठंड के मौसम में पशुओं को आरामदायक बिछावन देना भी बहुत जरूरी होता है. इसके लिए ऊन, पुआल या सूखे भूसे की बिछावन कोठे में अवश्य बिछाएं, ताकि पशुओं के शरीर को नीचे से ठंड न लगे. वही डॉ खांडे यह भी कहा कि वर्तमान में जांजगीर में अत्यधिक ठंड पड़ रही है, जिसके कारण अत्यधिक सर्दी होने की स्थिति में पशुओं को बोरा या अन्य गर्म कपड़े से ढककर रखने की व्यवस्था भी करनी चाहिए, जिससे उन्हें ठंड से राहत मिल सके. क्योंकि ठंड से बचाव न होने पर पशुओं का दूध उत्पादन प्रभावित होता है और उत्पादन में गिरावट आ सकती है.
वही बताया की दूध उत्पादन बनाए रखने में पशुओं के चारे और दाने की भूमिका भी अत्यंत महत्वपूर्ण होती है, सर्दी के मौसम में पशुओं को संतुलित और पौष्टिक आहार देना बेहद जरूरी है, पशु आहार में कार्बोहाइड्रेट की पर्याप्त मात्रा होनी चाहिए, जो पशुओं को ऊर्जा प्रदान करता है, वहीं प्रोटीन शरीर के निर्माण और मजबूती में सहायक होता है. इसके साथ-साथ विटामिन और खनिज लवण यानी मिनरल्स भी पशुओं के स्वास्थ्य के लिए आवश्यक होते हैं, इसलिए इन सभी पोषक तत्वों को संतुलित मात्रा में पशु आहार में शामिल करना चाहिए.
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