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Vastu Tips: भारतीय घरों में अक्सर बड़े-बुजुर्ग टोकते हैं कि मंगलवार और शनिवार को नाखून या बाल नहीं काटने चाहिए. जिसे हम आज तक केवल एक पुरानी सोच या अंधविश्वास मानते आए हैं, उसके पीछे असल में गहरे धार्मिक और व्यवहारिक कारण छिपे हैं. हनुमान जी की ऊर्जा से लेकर शनि देव के अनुशासन तक, आखिर क्यों इन दो दिनों में शरीर के अंगों की कांट-छांट को वर्जित माना गया है? क्या इसके पीछे बिजली की कमी जैसे ऐतिहासिक कारण थे या कोई बड़ा वास्तु दोष. आइए आचार्य विनय जोशी से जानिए इस प्राचीन परंपरा का वो वैज्ञानिक और आध्यात्मिक सच.
भारतीय संस्कृति में कई ऐसी परंपराएं और मान्यताएं हैं, जो सदियों से चली आ रही हैं. इन्हीं में से एक मान्यता है कि मंगलवार और शनिवार के दिन नाखून और बाल नहीं काटने चाहिए. आज के समय में कुछ लोग इसे केवल परंपरा मानते हैं, लेकिन बहुत से लोग अब भी इस नियम का पालन करते हैं. इसके पीछे धार्मिक और पारंपरिक दोनों तरह के कारण बताए जाते हैं.

हिंदू धर्म में मंगलवार का दिन भगवान हनुमान को समर्पित माना जाता है. इस दिन लोग विशेष रूप से हनुमान जी की पूजा करते हैं, व्रत रखते हैं और मंदिर जाकर प्रार्थना करते हैं. आचार्य विनय जोशी का कहना है कि मंगलवार का दिन ऊर्जा, शक्ति और साहस का प्रतीक होता है. पुराने समय में माना जाता था कि इस दिन शरीर से जुड़ी कोई चीज काटना, जैसे नाखून या बाल, शुभ नहीं होता. ऐसा करने से घर की सकारात्मक ऊर्जा कम हो सकती है. इसलिए लोग इस दिन ज्यादा से ज्यादा पूजा-पाठ और संयम पर ध्यान देते थे और ऐसे कामों से बचते थे.

शनिवार का दिन शनि देव का माना जाता है. शनि देव को कर्मों का फल देने वाला देवता कहा जाता है. लोगों का विश्वास है कि इस दिन किए गए कामों का प्रभाव जीवन पर गहरा पड़ता है. इसी वजह से कई लोग शनिवार को नाखून और बाल काटने से बचते हैं. मान्यता है कि ऐसा करने से शनि देव नाराज हो सकते हैं और जीवन में बाधाएं या परेशानियां बढ़ सकती हैं. इसलिए इस दिन लोग पूजा-पाठ, दान और सेवा जैसे कामों पर ज्यादा ध्यान देते हैं.
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कुछ लोग यह भी मानते हैं कि इस परंपरा के पीछे व्यावहारिक कारण भी हो सकते हैं. पहले के समय में बिजली नहीं होती थी और लोग ज्यादातर काम दिन के उजाले में करते थे. हफ्ते के कुछ दिन खास तौर पर पूजा, विश्राम और सामाजिक कार्यों के लिए रखे जाते थे. इसलिए उन दिनों नाखून या बाल काटने जैसे काम नहीं किए जाते थे.<br />धीरे-धीरे यह परंपरा मान्यता के रूप में लोगों के जीवन का हिस्सा बन गई.

आचार्य विनय जोशी के अनुसार, हिंदू धर्म में हर दिन किसी न किसी ग्रह और देवता से जुड़ा होता है. उनका कहना है कि मंगलवार और शनिवार को शरीर से जुड़ी चीजों को काटने से बचने की परंपरा इसलिए बनाई गई ताकि लोग इन दिनों आध्यात्मिकता और पूजा-पाठ पर ज्यादा ध्यान दें.

आज के समय में कई लोग इन मान्यताओं को धार्मिक आस्था से जोड़कर देखते हैं, जबकि कुछ लोग इसे केवल परंपरा मानते हैं. लेकिन भारतीय संस्कृति की खास बात यही है कि यहां परंपराओं का सम्मान किया जाता है. अगर कोई व्यक्ति इन नियमों को मानना चाहता है तो वह मान सकता है, और अगर कोई इसे केवल परंपरा समझकर नजरअंदाज करता है तो यह भी उसकी अपनी सोच है.
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