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White jamun thai variety farming : थाईलैंड से आई थाई वाइट जामुन की किस्म अब किसानों के लिए कमाई का नया जरिया बन सकती है. गार्डनिंग एक्सपर्ट हेमलाल पटेल के अनुसार यह पौधा जल्दी फल देने वाला और कम देखभाल में उगने वाला है. मार्च में इसकी रोपाई सबसे बेहतर मानी जाती है और करीब दो साल में फल मिलना शुरू हो जाता है.
Agri News : बागवानी में नए – नए प्रयोग किसानों और गार्डनिंग के शौकीनों के लिए काफी लाभदायक साबित हो रहे हैं. इसी कड़ी में अब थाई वाइट जामुन की खेती छत्तीसगढ़ में भी तेजी से लोकप्रिय हो रही है. स्वाद, उत्पादन और बाजार में अच्छी कीमत मिलने की वजह से यह किस्म किसानों के लिए मुनाफे का सौदा बन सकती है. गार्डनिंग एक्सपर्ट हेमलाल पटेल के अनुसार यह जामुन की एक उन्नत विदेशी किस्म है, जो थाईलैंड से आई है और अब भारत के कई राज्यों में लगाई जा रही है.
एक्सपर्ट हेमलाल पटेल बताते हैं कि इस जामुन की सबसे खास बात इसका रंग और स्वाद है. जब फल पूरी तरह पक जाता है तो इसका रंग सफेद दिखाई देता है, इसलिए इसे थाई वाइट जामुन कहा जाता है. स्वाद के मामले में यह काफी मीठा और टेस्टी होता है, जिसके कारण बाजार में इसकी मांग भी तेजी से बढ़ रही है.
थाई वाइट जामुन के ढाई से तीन फीट के पौधों में ही फूल
इस किस्म की एक और बड़ी खासियत यह है कि इसके ग्राफ्टेड पौधे बहुत जल्दी फल देना शुरू कर देते हैं. सामान्य जामुन के पेड़ों में फल आने में कई साल लग जाते हैं, लेकिन थाई वाइट जामुन के ढाई से तीन फीट के पौधों में ही फूल आने लगते हैं और करीब दो साल में फल लगना शुरू हो जाता है. यही कारण है कि किसान इसे कम समय में बेहतर उत्पादन के लिए पसंद कर रहे हैं.
देखभाल के मामले में भी यह पौधा काफी आसान माना जाता है. हेमलाल पटेल बताते हैं कि इसकी देखरेख आम, अमरूद और जामुन के अन्य पौधों की तरह ही की जाती है. सेब या नाशपाती की तरह ज्यादा संवेदनशील देखभाल की जरूरत नहीं होती. इसकी पत्तियां मोटी होती हैं, इसलिए छोटे-मोटे फंगस या बीमारियों का असर कम पड़ता है.
पौधा लगाने के लिए दो बाई दो फीट का गड्ढा खोदकर उसमें मिट्टी और गोबर खाद मिलाकर पौधा लगाना चाहिए. जामुन के पौधे को पानी की अच्छी जरूरत होती है, इसलिए नदी-नालों के आसपास इसकी ग्रोथ अच्छी होती है. छत्तीसगढ़ की जलवायु भी इस फसल के लिए अनुकूल मानी जाती है.
पौधारोपण के लिए मार्च का महीना सबसे उपयुक्त
हेमलाल पटेल का कहना है कि अगर किसान इस किस्म की कमर्शियल खेती करते हैं तो उन्हें बाजार में अच्छी कीमत मिल सकती है. इसकी पैदावार अधिक होती है और फल भी स्वादिष्ट होते हैं, जिससे मुनाफा बढ़ने की संभावना रहती है. पौधारोपण के लिए मार्च का महीना सबसे उपयुक्त माना जाता है. इसके अलावा जून-जुलाई में भी पौधे लगाए जा सकते हैं. सरायपाली स्थित ग्रीन लाइफ नर्सरी में इस किस्म के ढाई से तीन फीट ऊंचाई वाले पौधे लगभग 250 रुपये में उपलब्ध हैं.
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7 वर्षों से पत्रकारिता में अग्रसर. इलाहबाद विश्वविद्यालय से मास्टर्स इन जर्नालिस्म की पढ़ाई. अमर उजाला, दैनिक जागरण और सहारा समय संस्थान में बतौर रिपोर्टर, उपसंपादक औऱ ब्यूरो चीफ दायित्व का अनुभव. खेल, कला-साह…और पढ़ें
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