Wheat Cultivation Tips : कृषि वैज्ञानिक डॉ० प्रमोद कुमार ने बताया कि झारखंड और बिहार में गेहूं की बुआई आमतौर पर नवंबर के दूसरे पखवाड़े से दिसंबर के पहले सप्ताह तक की जाती है. समय पर बुआई करने से पौधों को शुरुआती बढ़वार के लिए अनुकूल तापमान मिलता है. बुआई के समय खेत की अच्छी तैयारी, समतल जमीन और लाइन से बुआई करना जरूरी होता है
झारखंड और बिहार में रबी मौसम के दौरान गेहूं की खेती बड़े पैमाने पर की जाती है. यहां के किसान सीमित संसाधनों में भी बेहतर पैदावार पाने के लिए वैज्ञानिक तरीके अपनाने लगे हैं. सही समय पर बुआई, संतुलित खाद और उचित सिंचाई से गेहूं की फसल अच्छी उपज दे सकती है. खासतौर पर पहली सिंचाई गेहूं की पैदावार तय करने में अहम भूमिका निभाती है.

पलामू जिले के क्षेत्रीय अनुसंधान केंद्र चियांकी के कृषि वैज्ञानिक डॉ० प्रमोद कुमार ने बताया कि झारखंड और बिहार में गेहूं की बुआई आमतौर पर नवंबर के दूसरे पखवाड़े से दिसंबर के पहले सप्ताह तक की जाती है. समय पर बुआई करने से पौधों को शुरुआती बढ़वार के लिए अनुकूल तापमान मिलता है. बुआई के समय खेत की अच्छी तैयारी, समतल जमीन और लाइन से बुआई करना जरूरी होता है, ताकि पौधों का विकास समान रूप से हो सके.

आगे कहा कि गेहूं की फसल में पहली सिंचाई को “क्रिटिकल स्टेज” माना जाता है. इसी समय पौधों में कल्ले निकलने की प्रक्रिया शुरू होती है. अगर इस चरण पर सही मात्रा में पानी और पोषण न मिले, तो कल्लों की संख्या कम रह जाती है, जिससे सीधे पैदावार पर असर पड़ता है.
Add News18 as
Preferred Source on Google

उन्होंने कहा कि बुआई के बाद लगभग 18 से 25 दिन के बीच पहली सिंचाई देना सबसे उपयुक्त माना जाता है. सामान्यतः 21 दिन के आसपास पहली सिंचाई करने से अच्छे परिणाम मिलते हैं. बहुत जल्दी या बहुत देर से सिंचाई करने पर पौधों की बढ़वार प्रभावित हो सकती है.

उन्होंने बताया कि कई किसान पहली सिंचाई के समय सिर्फ पानी देते हैं, जबकि इस समय पौधों को अतिरिक्त पोषण की जरूरत होती है. पहली सिंचाई के साथ अगर सही उर्वरक दिया जाए, तो जड़ें मजबूत होती हैं और पौधे तेजी से बढ़ते हैं.

उन्होंने बताया कि पहली सिंचाई के समय 30 से 35 किलो यूरिया प्रति एकड़ देना फायदेमंद होता है. यूरिया में मौजूद नाइट्रोजन पौधों की शुरुआती बढ़वार को तेज करता है और कल्ले निकलने में मदद करता है. इससे खेत हरा-भरा और घना दिखाई देने लगता है.

आगे कहा कि अगर खेत की मिट्टी में जिंक की कमी हो, तो पहली सिंचाई के समय 5 से 7 किलो जिंक सल्फेट प्रति एकड़ जरूर मिलाएं. जिंक पौधों के विकास में अहम भूमिका निभाता है और पोषक तत्वों के अवशोषण को बेहतर बनाता है.

उन्होंने बताया कि नाइट्रोजन (यूरिया) और जिंक सल्फेट का सही मिश्रण गेहूं के पौधों को जल्दी और ज्यादा कल्ले देने में मदद करता है. इससे पौधे घने होते हैं और अंत में बालियों की संख्या बढ़ती है, जिसका सीधा असर उपज पर पड़ता है. सही समय पर पहली सिंचाई और उर्वरक प्रबंधन अपनाकर किसान गेहूं की बेहतर पैदावार हासिल कर सकते हैं.
Discover more from India News
Subscribe to get the latest posts sent to your email.