इनमें फ्यूजेरियम हेड ब्लाइट (Fusarium Head Blight – FHB) जिसे स्कैब रोग भी कहा जाता है, बेहद खतरनाक माना जाता है. यह रोग न केवल उपज घटाता है, बल्कि दानों में मायकोटॉक्सिन नामक विषैले तत्व बना देता है, जो इंसान और पशुओं के स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हैं.
ऐसे होते हैं रोग के लक्षण
रोग के लक्षण आमतौर पर गेहूं में फूल आने के बाद दिखाई देते हैं, जो सबसे संवेदनशील अवस्था होती है. इसके मुख्य लक्षण हैं कि बालियों का कुछ हिस्सा या पूरी बाली समय से पहले सफेद या भूरी हो जाती है. नमी वाली स्थिति में संक्रमित भाग पर गुलाबी या नारंगी रंग की फफूंद दिखती है. दाने सिकुड़ जाते हैं, हल्के हो जाते हैं और चाक जैसे दिखाई देते हैं. दानों का वजन और अंकुरण क्षमता कम हो जाती है और खेत में असमान पकाव दिखता है.
ऐसी स्थितियों में फैलता है रोग
रोग चक्र की बात करें तो यह रोग गेहूं और मक्का के संक्रमित अवशेषों में बना रहता है. अनुकूल मौसम मिलने पर बीजाणु हवा और बारिश की बूंदों के जरिए बालियों तक पहुंचते हैं. इस रोग के लिए 20 से 30 डिग्री तापमान, 90 प्रतिशत से अधिक नमी, फूल आने के समय लगातार वर्षा या ओस, घनी फसल और कम हवा का चलना अनुकूल स्थिति मानी जाती है.
यह रोग दोहरी हानि पहुंचाता है. पहली, उपज में कमी और दूसरी, दानों की गुणवत्ता में गिरावट. टेस्ट वेट कम हो जाता है और मायकोटॉक्सिन की वजह से अनाज का बाजार मूल्य घट जाता है. कई बार निर्यात और खाद्य उपयोग में भी इसे अस्वीकार कर दिया जाता है.
रोग की पहचान खेत और प्रयोगशाला दोनों स्तर पर की जाती है. खेत में यदि आंशिक या पूरी बाली सफेद हो रही हो और गुलाबी फफूंद दिखे तो तुरंत सतर्क हो जाएं.
कई उपाय करने चाहिए
रोग प्रबंधन के तहत कई उपाय अपनाने चाहिए. प्रतिरोधी किस्मों का चयन करें. फसल चक्र अपनाएं, खासकर मक्का के बाद गेहूं लगाने से बचें. खेत में फसल अवशेषों का सही प्रबंधन करें. संतुलित उर्वरक उपयोग और उचित दूरी पर बुवाई करें. जरूरत पड़ने पर विशेषज्ञ की सलाह से फफूंदनाशी का छिड़काव करें. जैविक उपाय भी सहायक हो सकते हैं.
ऐसे रोक सकते हैं नुकसान
आजकल मौसम आधारित रोग पूर्वानुमान मॉडल, रिमोट सेंसिंग और एआई जैसी तकनीकों से भी समय पर चेतावनी मिल रही है, जिससे किसान पहले से तैयारी कर सकते हैं. कटाई के बाद दानों की सफाई और ग्रेडिंग करें. दानों को 14 प्रतिशत से कम नमी पर सुखाकर सुरक्षित भंडारण करें. समय-समय पर विषाक्तता की जांच भी जरूरी है. फ्यूजेरियम हेड ब्लाइट गेहूं की गंभीर बीमारी है. लेकिन सही समय पर पहचान और वैज्ञानिक तरीके अपनाकर इससे होने वाले नुकसान को काफी हद तक रोका जा सकता है.
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