रबी सीजन में गेहूं की बुआई सबसे प्रमुख है. अच्छी बारिश होने और अक्टूबर में आए मेंथा तूफान के कारण खेतों में पर्याप्त नमी बनी हुई है, जिससे गेहूं की खेती के लिए मिट्टी की स्थिति बेहद अनुकूल हो गई है.
कैसे करें गेहूं की बुआई
गेहूं की सफल फसल के लिए खेत की अच्छी जुताई, लेवलिंग और बुआई के पहले की तैयारी बेहद जरूरी है. नमी वाले खेत में हल्की जुताई करके मिट्टी भुरभुरी करें, जिससे बीज अच्छी तरह जम सके. बीज उपचार अवश्य करें ताकि रोगों का संक्रमण न हो. बुआई के समय 100 किलो बीज प्रति हेक्टेयर की मात्रा उपयुक्त मानी जाती है. लाइन से बुआई करने पर पौधों को पर्याप्त जगह मिलती है और मशीनों से निराई–गुड़ाई भी आसान हो जाती है. खेत में नमी बनी हो तो सिंचाई की आवश्यकता नहीं पड़ती और अंकुरण बेहतर होता है.
कौन–सी किस्म चुनें
बुआई से पहले किस्म का चयन अत्यंत महत्वपूर्ण है. विशेषज्ञों के अनुसार इस क्षेत्र के मौसम और मिट्टी के लिए डीबीडब्ल्यू-187 सबसे उपयुक्त किस्म मानी गई है, जिसे किसान करन वंदना के नाम से भी जानते हैं. यह किस्म रोग-प्रतिरोधी होने के साथ अधिक उत्पादन देने के लिए प्रसिद्ध है. सही प्रबंधन के साथ यह प्रति एकड़ लगभग 32 क्विंटल तक पैदावार देने की क्षमता रखती है. बदलते मौसम और अनियमित तापमान के दौर में यह किस्म किसानों के लिए सुरक्षित और लाभकारी विकल्प सिद्ध हो रही है.
बुआई का सही समय
इस वर्ष बारिश अच्छी होने और खेतों में नमी बने रहने से बुआई के लिए समय उपयुक्त है. उन्होंने कहा कि गेहूं की समय पर बुआई ही अधिक उत्पादन की कुंजी है. किसान भाई 10 दिसंबर तक बुआई कर लें तो सर्वोत्तम परिणाम मिलेंगे. हालांकि जिन खेतों में नमी अधिक है, वे किसान 15 दिसंबर तक बुआई कर सकते हैं. देर से बुआई करने पर तापमान के बढ़ने का असर पड़ता है, जिससे उत्पादन घट सकता है. इसलिए अनुशंसित अवधि में बुआई करना ही फसल के लिए सबसे लाभदायक रहता है.
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