जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की रिहाई को लद्दाख में माहौल बेहतर बनाने के प्रयासों के रूप में देखा जा रहा है। हाईपावर कमेटी की बैठक में भी लगातार वांगचुक की रिहाई की मांग उठाई जा रही थी। लेह हिंसा के बाद जिस तरह से वांगचुक को हिरासत में लिया गया और राष्ट्रद्रोह के आरोप लगे, उससे लद्दाख के तमाम लोग आहत थे।
नए उपराज्यपाल के रूप में विनय कुमार सक्सेना के शपथ के दूसरे ही दिन वांगचुक को रिहा किया जा रहा है। जिस तरह से पहले दिन शपथ लेते ही पत्रकारों से रूबरू होकर एलजी ने सभी को साथ लेकर आगे चलने की बात कही थी इससे ऐसी पहल के संकेत मिल रहे थे। कहा जा रहा है कि वांगचुक की रिहाई का सुझाव भी नवनियुक्त एलजी का था।
अब लोगों में लेह हिंसा के दौरान हिरासत में लिए गए सभी लोगों की रिहाई की भी उम्मीद जगी है। लेह एपेक्स बॉडी (एलएबी) के को-चेयरमैन छेरिंग दोरजे ने खुद सोनम वांगचुक की रिहाई का स्वागत करते हुए इसे अपनी बड़ी जीत बताया। साथ ही यह भी कहा कि नए एलजी से उनकी मुलाकात हुई है और उन्होंने लद्दाख के विकास पर बात की। अभी तक उनका रुख सकारात्मक दिखा है। छेरिंग दोरजे के अनुसार लद्दाख के हितों की रक्षा उनकी पहली प्राथमिकता है। गृह मंत्रालय के सामने बात रख चुके हैं। अब एलजी पर भी नजरें हैं। यहां से बात वे ऊपर तक पहुंचाएंगे। राहत इस बात से है कि लद्दाख के लोगों पर राष्ट्रद्रोह का जो आरोप लगा था, अब वह धुल जाएगा।
लद्दाख स्वायत्त पर्वतीय विकास परिषद, कारगिल के चेयरमैन डॉ. मोहम्मद जफर अखून भी सोनम वांगचुक की रिहाई से काफी खुश दिखे। उनके अनुसार यह एक अच्छा कदम है। इससे लद्दाख के लोगों के साथ समन्वय बनाने में सहायता मिलेगी। एलजी अभी नए हैं। पद संभाले दो ही दिन हुए हैं। आगे उनसे लद्दाख की बेहतरी के लिए कदम उठाने की उम्मीद है।
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