उपचुनावों में वोटिंग प्रतिशत कम होने के पैटर्न के साथ दिल्ली नगर निगम चुनाव में राजनीतिक दलों की दिलचस्पी भी खास नहीं दिखी। विधानसभा चुनाव के बाद नेताओं ने भी लोगों से अपनी थोड़ी दूरी बना ली, जिसका मिला-जुला असर यह रहा कि गिरते तापमान के बीच ठंडे प्रचार के बीच सियासी पारा ऊपर नहीं चढ़ सका।
नतीजतन अधिकतर मतदाता घरों से नहीं निकले, जिसके चलते मतदान प्रतिशत 40 फीसदी तक भी नहीं पहुंचा। राजनीतिक विशेषज्ञों का कहना है कि उपचुनावों में सामान्य पैटर्न आम चुनावों जैसा नहीं दिखता। इसमें कोई ऐसा मुद्दा भी नहीं होता कि जिसके आकर्षक से वोटर बूथ तक जाएं। इसकी वजह से लोगों में मतदान के प्रति उत्साह कम रहता है।
फिर, दिल्ली निगम के उपचुनाव में तीनों राजनीतिक पार्टियां भी पूरे जोर-शोर से चुनावी महौल को गरमा नहीं सकीं। निगम से निकलकर दिल्ली की मुख्यमंत्री बनीं रेखा गुप्ता बेशक कई वार्ड में सक्रिय रहीं, लेकिन आम आदमी पार्टी और कांग्रेस का कोई बड़ा नेता मैदान में नहीं उतरा।
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