वीआईटी कैंपस में पढ़ रहे हजारों छात्रों की सेहत के साथ जो खिलवाड़ हो रहा था, वह आखिर पीएचई की जांच रिपोर्ट के बाद सामने आ ही गया। रिपोर्ट में खुलासा हुआ कि हॉस्टल और कैंटीन में मिलने वाला पानी बैक्टीरिया से भरा हुआ है। कुल 18 सैंपल लिए गए थे, जिनमें से चार में बैक्टीरिया मिला। यानी छात्र रोजाना ऐसा पानी पीने को मजबूर थे, जो सीधे बीमारी को न्योता दे रहा था। लाखों फीस देने के बावजूद छात्रों को पीने के साफ पानी तक की सुविधा तक नहीं मिली।
सबसे अधिक बीमार तो वही छात्र… जहां पानी सबसे ज्यादा दूषित
जिन चार सैंपलों की रिपोर्ट फेल आई है, उनमें अकेले तीन बॉयज हॉस्टल ब्लॉक-1 के हैं। वही ब्लॉक जहां सबसे ज्यादा छात्र बीमार पड़े थे और बीमारी से तंग आकर गुस्से में तोड़फोड़ भी हुई थी। पीलिया, वायरल फीवर, पेट दर्द और थकावट जैसे लक्षणों से छात्र लंबे समय से जूझ रहे थे। छात्र शिकायत पर शिकायत करते रहे, लेकिन प्रबंधन ने शिकायतों को नजरअंदाज किया। मजबूरी में कई छात्रों को बोतलबंद पानी खरीदकर पीना पड़ा।
कैंटीन का खाना भी दूषित पानी से बनकर परोसा गया
कैंपस की लापरवाही यहीं खत्म नहीं होती। जांच में यह भी स्पष्ट हुआ कि कैंटीन में इस्तेमाल होने वाला पानी भी दूषित था। मयूरी कैटरर कैंटीन के सैंपल में बैक्टीरिया पाए गए हैं। यानी जो खाना छात्रों को परोसा गया, वह भी उसी संक्रमित पानी से तैयार हुआ। पेट दर्द, उल्टी-दस्त और कमजोरी की शिकायतें लगातार बढ़ती रही… लेकिन प्रबंधन आंखें बंद कर बैठा रहा। स्वास्थ्य विभाग की टीम द्वारा रात में की गई मेडिकल जांच में बड़ी संख्या में छात्रों में बीमारी के लक्षण मिले थे।
जिला प्रशासन का सख्त कदम, प्रबंधन अभी भी बचाव में
25-26 नवंबर की देर रात कैंपस में हुए बवाल के बाद प्रशासन हरकत में आया। 15 नये सैंपल लिए गए और पूरी जांच के आदेश जारी हुए। पीएचई के कार्यपालन यंत्री प्रदीप सक्सेना ने स्पष्ट कहा कि चार सैंपल फेल हुए हैं, निवारक उपाय अनिवार्य हैं। एसडीएम नितिन टाले ने भी प्रबंधन को कार्रवाई करने के लिए पत्र भेज दिया, लेकिन प्रबंधन की प्रतिक्रिया आज भी टालमटोल वाली ही रही। रजिस्ट्रार केके नायर का कहना है कि रिपोर्ट मिली नहीं है। कमी पाई तो एक्शन लेंगे। यह बयान छात्रों के दर्द पर मरहम नहीं, नमक जैसा महसूस हुआ।
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कितना नुकसानदेह है बैक्टीरिया, चिंता बढ़ाने वाली चेतावनी
जिला अस्पताल के सिविल सर्जन प्रभारी डॉ. आरके वर्मा के अनुसार बैक्टीरिया युक्त पानी गंभीर रूप से हानिकारक होता है। इससे उल्टी-दस्त, बुखार और कई बार जिगर तक प्रभावित हो सकता है। ब्लॉक-1 में ही दो हजार से अधिक छात्र रहते हैं और यही दूषित आरओ का पानी उन सभी तक सप्लाई होता था। यानी बीमारी केवल कुछ छात्रों में नहीं, बल्कि हजारों बच्चों तक पहुंचने की संभावित चपेट में थी।
लाखों फीस, बड़े सपने… लेकिन कैंपस में मिला बीमारियों का अंधेरा
छात्र वीआईटी में दाखिला लेते हैं, ताकि भविष्य संवार सकें, लेकिन यहां बच्चों को मिली बीमारी और अनसुनी शिकायतों की लंबी लिस्ट। परिजनों का कहना है कि माता-पिता घर से दूर बच्चों को सुरक्षित माहौल, अच्छी शिक्षा और भरोसे के साथ भेजते हैं। कैंपस में जो कुछ हुआ, वह केवल लापरवाही नहीं, छात्रों की सेहत और भविष्य से खिलवाड़ है। अब जिम्मेदारी प्रबंधन और प्रशासन दोनों की है कि हालात सुधारें, दोषियों पर कार्रवाई हो और बीमार पड़े छात्रों को न्याय और सुरक्षित वातावरण मिले।
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