कोरबा के करतला वन परिक्षेत्र अंतर्गत पसरखेत के कोलगा गांव में कूप कटिंग के विरोध में ग्रामीणों का प्रदर्शन जारी है। सोमवार को कोलगा समेत आसपास के कई गांवों के ग्रामीण बड़ी संख्या में कलेक्ट्रेट पहुंचे। उन्होंने कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर कूप कटिंग पर त
कलेक्ट्रेट में ज्ञापन सौंपने के बाद ग्रामीण कोरबा वनमंडल कार्यालय (डीएफओ कार्यालय) पहुंचे। ग्रामीणों की भारी भीड़ को देखते हुए डीएफओ कार्यालय का मुख्य द्वार बंद कर दिया गया। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए सिविल लाइन थाना पुलिस और वन विभाग के अधिकारी मौके पर पहुंचे।
एफआईआर के बाद तेज हुआ कूप कटिंग विरोध
ग्रामीणों का यह विरोध कुछ दिन पहले हुई एक घटना के बाद और तेज हो गया है। बताया जा रहा है कि कूप कटिंग के दौरान ग्रामीणों ने वन कर्मियों के औजार जब्त कर लिए थे। इस मामले में करतला थाना में लगभग 50 ग्रामीणों के खिलाफ विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है।
इस एफआईआर के विरोध में हाल ही में आसपास के छह गांवों के ग्रामीणों ने एक बैठक की थी। इसमें एकजुट होकर आंदोलन करने का निर्णय लिया गया था।

कोरबा वनमंडल में कूप कटिंग का ग्रामीणों ने किया विरोध
कोरबा वनमंडल के पसरखेत वन परिक्षेत्र में ‘सिलेक्शन कम इम्प्रूवमेंट’ योजना के तहत कूप कटिंग का कार्य चल रहा है। इसके तहत कोलगा गांव के गुफा एरिया, बांधा पतरा, ढोंढटिकरा और मोहनपुर में मजदूरों द्वारा पेड़ों की कटाई की जा रही है, जिसका ग्रामीण लगातार विरोध कर रहे हैं।
मौके पर सिविल लाइन थाना पुलिस के साथ मानिकपुर और कोतवाली पुलिस भी पहुंची। पुलिस बल ग्रामीणों को समझाने का प्रयास कर रहा है।

ग्रामीणों ने लगाया फर्जी मामले दर्ज करने का आरोप
ग्रामीण दीप्ति खजूर ने बताया कि ग्रामीणों के खिलाफ दर्ज किया गया मामला फर्जी है। उनके अनुसार, कई लोग घटना के समय अपने घरों में थे, जबकि कुछ अस्पताल में भर्ती थे।
ग्रामीण बरातु बाई ने कहा कि यह आदिवासी क्षेत्र है और यहां के लोग जंगल पर निर्भर है। उन्होंने सवाल उठाया कि अगर जंगल में कटाई शुरू हो जाएगी तो वे क्या करेंगे, इसलिए वे कूप कटिंग का विरोध कर रहे हैं।
स्थानीय जनप्रतिनिधि अभिमन्यु रतिया ने बताया कि कूप कटिंग का विरोध पहले भी किया गया था और अब भी जारी है। उन्होंने कहा कि जब तक कोई समाधान नहीं निकलता, तब तक कूप कटिंग का कार्य बंद रहेगा।
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