{“_id”:”698dace88da70a6278085935″,”slug”:”video-rampur-bushahr-central-trade-unions-open-front-in-rampur-against-four-labor-codes-and-anti-labor-policies-2026-02-12″,”type”:”video”,”status”:”publish”,”title_hn”:”Rampur Bushahr: चार श्रम संहिताओं, मजदूर विरोधी नीतियों के खिलाफ रामपुर में केंद्रीय ट्रेड यूनियन ने खोला मोर्चा”,”category”:{“title”:”City & states”,”title_hn”:”शहर और राज्य”,”slug”:”city-and-states”}}
सीटू, अखिल भारतीय किसान सभा सहित दस केंद्रीय ट्रेड यूनियनों और स्वतंत्र क्षेत्रीय संघों के संयुक्त मंच के आह्वान पर रामपुर में केंद्र सरकार की मजदूर विरोधी, किसान विरोधी, राष्ट्र विरोधी, कॉरपोरेट समर्थक नीतियों के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया गया। सैकड़ों कार्यकर्ताओं ने राष्ट्रव्यापी आम हड़ताल में शामिल होकर रामपुर में एक विशाल रैली निकाली। कार्यकर्ताओं ने गौरा चौक से लेकर मुख्य बाजार रामपुर होते हुए एसडीएम कार्यालय तक यह रोष रैली निकाली। प्रदर्शन को संबोधित करते हुए हिमाचल किसान सभा के राज्य महासचिव राकेश सिंघा और अन्य वक्ताओं ने कहा कि 21 नवंबर 2025 को चार लेबर कोड को लागू करने की अधिसूचना जारी करके देश भर के मजदूरों के खिलाफ मालिकों को खुली लूट करने के लिए मोदी सरकार ने मजदूरों को निहत्था कर दिया है। मजदूरों को रोजगार की गारंटी देने वाले मनरेगा कानून को खत्म करने के लिए लाए गए वीबी जीरामजी विधेयक से ग्रामीण रोजगार पर चोट कर किसानों की अर्थव्यवस्था पर हमला कर ग्रामीण रोजगार के अवसरों को खत्म कर दिया है। श्रम संहिताएं उचित विधि का पालन किए बिना, हितधारकों से परामर्श किए बिना और भारतीय श्रम सम्मेलन आयोजित किए बिना लागू की गईं, जो उन अंतरराष्ट्रीय श्रम मानकों का उल्लंघन है और इन पर भारत एक राष्ट्र राज्य के रूप में हस्ताक्षरकर्ता है। इन संहिताओं को संसद में जबरदस्ती पारित किया गया और तीन संहिताओं के मामले में तो संसद में पूर्ण विपक्ष की अनुपस्थिति में और कोविड-19 काल में आपदा प्रबंधन अधिनियम के बावजूद पारित किया गया। अधिसूचित श्रम संहिताएं और मसौदा नियम सामूहिक सौदेबाजी को कुचलने और हड़ताल के अधिकार को छीनने के लिए हैं। लगभग 70 प्रतिशत कारखाने श्रम कानून के दायरे से बाहर हो जाएंगे। श्रमिकों का एक बड़ा हिस्सा व्यावसायिक सुरक्षा और सामाजिक सुरक्षा से वंचित हो जाएगा। कुल मिलाकर श्रम संहिताएं सरकार की ओर से श्रमिकों और उनके ट्रेड यूनियनों पर गुलामी की स्थिति थोपने के लिए सुनियोजित रूप से तैयार की गई हैं, ताकि उनके कॉरपोरेट आकाओं को मजदूरों, किसानों और आम जनता की लूट जारी रखने में मदद मिल सके। विकसित भारत रोजगार और आजीविका मिशन अधिनियम 2025 से बदलने से अधिकार आधारित रोजगार गारंटी खत्म हो जाती है, वित्तीय जिम्मेदारी राज्यों पर चली जाती है। सस्ते मजदूरों को सुनिश्चित करने के लिए फसल कटाई के मौसम में काम पर रोक लग जाती हैए और ग्रामीण संकट और गहरा हो जाता है। बीमा क्षेत्र में 100 प्रतिशत एफडीआई की अनुमति देने का फैसला प्रस्तावित विकसित भारत शिक्षा अधिष्ठान विधेयक, मसौदा बीज विधेयक और मसौदा बिजली विधेयक 2025 मिलकर कृषि, शिक्षा, बिजली उपभोक्ताओं और सार्वजनिक क्षेत्र के संस्थानों पर सीधा हमला करते हैं। उन्होंने कहा कि यह हड़ताल बिगड़ती अर्थव्यवस्था, बढ़ती बेरोजगारी, लोगों के लोकतांत्रिक अधिकारों पर बढ़ते हमलों, अल्पसंख्यकों के खिलाफ ध्रुवीकरण और घृणा के विषैले अभियानों, सभी लोकतांत्रिक संस्थानों पर हमलों और उन्हें सत्तारूढ़ दल के अंधभक्तों से भरने की चिंताजनक स्थिति की पृष्ठभूमि में हो रही है, जिनका उद्देश्य संघ बनाने, अभिव्यक्ति और असहमति व्यक्त करने की स्वतंत्रता के अधिकारों को समाप्त करना है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार जनता की जायज मांगों पर ध्यान देने के बजाय कॉरपोरेट जगत में अपने चहेतों के फायदे के लिए सभी वर्गों पर अपना हमला तेज कर रही है। इस हड़ताल के जरिए केंद्र सरकार मजदूर विरोधी चार श्रम संहिताओं और नियमों को निरस्त करने, आंगनबाड़ी, आशा और एमडीएम समेत सभी योजन मजदूरों को नियमित करके उन्हें सरकारी कर्मचारी बनाने, बीज विधेयक और विद्युत संशोधन विधेयक 2025 के मसौदे को वापस लेने, भारत के रूपांतरण के लिए परमाणु ऊर्जा के सतत दोहन और विकास अधिनियम को वापस लेने, मगनरेगा को बहाल करने, विकसित भारत गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन एक्ट 2025 को निरस्त करने, बीमा कंपनियों में 100 प्रतिशत प्रत्यक्ष विदेशी निवेश के फैसले को वापस लेने, विकसित भारत शिक्षा अधिष्ठान बिल 2025 वापिस लेने, सरकारी और सार्वजनिक क्षेत्र में खाली पदों को तुरंत भरा ने की मांग की है। इस मौके पर सीटू जिलाध्यक्ष कुलदीप सिंह, नीलदत शर्मा, कामराज, संजीव जोशी, तिलक वर्मा, राजपाल, तिलक ठाकुर, राजकुमार, सतीश, आंगनबाड़ी वर्कर्स यूनियन से बबली, रोमिला, मिड डे मील से राधा, कौशल्या, संगीता किसान सभा के जिलाध्यक्ष प्रेम कायथ, रणजीत ठाकुर, दयाल भाटनू, सुभाष सहित सैकड़ों मजदूर मौजूद रहे।
Discover more from India News
Subscribe to get the latest posts sent to your email.