वीडियो सामने आने के बाद यह मामला शिक्षा विभाग और प्रशासनिक हलकों में चर्चा का विषय बन गया है। कई लोगों ने इसे शिक्षा का अधिकार अधिनियम और बाल संरक्षण कानूनों का उल्लंघन बताया है। नियमों के अनुसार सरकारी स्कूलों में सफाई व्यवस्था के लिए अलग से सफाईकर्मी नियुक्त किए जाते हैं और छात्रों से इस प्रकार का कार्य कराना प्रतिबंधित है।
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इस मामले में शिक्षक कतिकराम कोल ने अपनी सफाई दी है। उनका कहना है कि बच्चों ने अपनी मर्जी से सफाई करने की बात कही थी और किसी भी छात्र से जबरदस्ती काम नहीं कराया गया। उन्होंने यह भी कहा कि बच्चे कैमरे के सामने आने से बचते नजर आ रहे हैं।
हालांकि वायरल वीडियो ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। अब यह देखना होगा कि शिक्षा विभाग इस मामले को कितनी गंभीरता से लेता है और जांच के बाद क्या कार्रवाई की जाती है। फिलहाल यह घटना सरकारी स्कूलों में मूलभूत सुविधाओं और निगरानी व्यवस्था पर एक बार फिर सवाल खड़े कर रही है।
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