जैन परंपरा के अनुसार, भगवान महावीर का जन्म 599 ईसा पूर्व बासोकुंड के निकट हुआ था. यहां स्थित भगवान महावीर जन्मस्थली मंदिर, अशोक स्तंभ, अभिषेक स्थल और अन्य ऐतिहासिक अवशेष श्रद्धालुओं के लिए आस्था का केंद्र हैं.
जैन परंपरा के अनुसार, भगवान महावीर का जन्म 599 ईसा पूर्व बासोकुंड के निकट हुआ था. यहां स्थित भगवान महावीर जन्मस्थली मंदिर, अशोक स्तंभ, अभिषेक स्थल और अन्य ऐतिहासिक अवशेष श्रद्धालुओं के लिए आस्था का केंद्र हैं. सुबह से शाम तक मंदिर परिसर में भक्ति गीतों, मंत्रोच्चार और ध्यान में लीन साधु-साध्वियों की उपस्थिति से वातावरण आध्यात्मिक हो उठा है.
पर्यटकों में केवल जैन समाज के लोग ही नहीं, बल्कि अन्य धर्मों के अनुयायी और इतिहास में रुचि रखने वाले लोग भी बड़ी संख्या में शामिल हैं. मुंबई, दिल्ली, कोलकाता, अहमदाबाद सहित देश के विभिन्न राज्यों के अलावा नेपाल और अन्य देशों से भी लोग बासोकुंड आ रहे हैं. कई श्रद्धालु इसे जीवन में एक बार अवश्य देखने योग्य स्थल मानते हैं.
बढ़ती पर्यटक संख्या से स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी लाभ मिल रहा है. होटल, धर्मशाला, स्थानीय दुकानें और परिवहन सेवाओं में रौनक बढ़ी है. स्थानीय लोग बताते हैं कि धार्मिक पर्यटन के कारण रोजगार के नए अवसर पैदा हो रहे हैं. प्रशासन ने सुरक्षा, साफ-सफाई और यातायात के विशेष इंतजाम किए हैं, ताकि श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा न हो.
कुल मिलाकर, बासोकुंड एक बार फिर श्रद्धा, इतिहास और पर्यटन का प्रमुख केंद्र बनकर उभर रहा है. यहां उमड़ रही भीड़ इस बात का प्रमाण है कि भगवान महावीर के अहिंसा, सत्य और शांति के संदेश आज भी लोगों को आकर्षित और प्रेरित कर रहे हैं. तो अगर आप नए साल पर धार्मिक जगह जाना चहते हैं तो बासोकुंड जा सकते हैं.
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न्यूज़18इंडिया में कार्यरत हैं. आजतक से रिपोर्टर के तौर पर करियर की शुरुआत फिर सहारा समय, ज़ी मीडिया, न्यूज नेशन और टाइम्स इंटरनेट होते हुए नेटवर्क 18 से जुड़ी. टीवी और डिजिटल न्यूज़ दोनों विधाओं में काम करने क…और पढ़ें
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