लोक सेवा आयोग द्वारा घोषित सिविल सेवा परीक्षा 2025 के परिणाम में बठिंडा ओमेक्स सिटी कॉलोनी की नवनीत कौर ने 111वीं रैंक हासिल की है।
नवनीत की इस सफलता से पूरे इलाके में खुशी का माहौल है। नवनीत कौर के पिता जसवंत सिंह और माता परमिंदर कौर दोनों ही सरकारी स्कूल में लेक्चरर हैं। परिवार का माहौल शिक्षा से जुड़ा होने के बावजूद नवनीत ने शिक्षण क्षेत्र के बजाय सिविल सेवा का रास्ता चुना और अपने सपने को पूरा करने के लिए लगातार मेहनत करती रहीं।
नवनीत बताती हैं कि बचपन में स्कूल के कार्यक्रमों में मुख्यातिथि के रूप में आने वाले आईएएस अधिकारियों का रुतबा और सम्मान देखकर उनके मन में भी सिविल सेवा में जाने का सपना जागा। तभी से उन्होंने आईएएस अधिकारी बनने का लक्ष्य तय कर लिया था। नवनीत का तीसरा प्रयास था, पहले दो प्रयासों में वह प्रारंभिक परीक्षा तक भी नहीं पहुंच सकीं, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। लगातार मेहनत, धैर्य और आत्मविश्वास के साथ तैयारी जारी रखी और तीसरे प्रयास में सफलता का परचम लहराया।
111वीं रैंक हासिल करने के बाद अब उन्हें आईएएस मिलने की पूरी उम्मीद है। हालांकि नवनीत का कहना है कि यदि उन्हें आईआरएस मिलता है तो भी वह अपने आईएएस बनने के सपने को पूरा करने के लिए चौथा प्रयास जरूर करेंगी।
खुद के प्रति ईमानदारी बरती
नवनीत ने आईएएस बनने के लिए पूरे सुनियोजित तरीके से तैयारी की, यूं कहें तो अपने प्रति पूरी तरह से ईमानदार बनी रही। सोशल मीडिया से दूरी बनाकर अपने समय को उपयोगी बनाया। एक साल तक डायरी मेंटेन की जिसमें डेली के स्टडी ऑवर लिखे और जिस दिन कुछ ज्यादा पढ़ाई नहीं की, वो भी लिखा। इंग्लिश लिटरेचर की वजह से किताबें पढ़ना आदत रही है, वहीं करंट अफेयर्स और प्रतिदिन चार-पांच अखबार भी रूटीन बनाया। पठन-पाठन से लिखने का शौक उभर आया है, अब नवनीत की एक अच्छी सी किताब लिखने की इच्छा है।
दिल्ली पब्लिक स्कूल से 12वीं आर्ट्स में 98.8% से टॉपर रही नवनीत कौर ने दिल्ली यूनिवर्सिटी बीए इंग्लिश ऑनर्स व जामिया मिलिया इस्लामिया कॉलेज से एमए इंग्लिश किया। नवनीत दिल्ली यूनिवर्सिटी में दो बार गोल्ड मेडलिस्ट रही। इसी दौरान उन्होंने अपनी सिविल सर्विसेज की पढ़ाई पर फोकस किया। उनका छोटा भाई गुरनूर बीटेक कर रहा है।
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