केंद्रीय मंत्री और हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा (सेक्युलर) के प्रमुख जीतन राम मांझी ने दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की रिहाई को कानूनी प्रक्रिया का परिणाम बताते हुए कहा कि साक्ष्यों की कमी के आधार पर बरी होना यह नहीं दर्शाता कि कोई पूरी तरह निर्दोष है। उन्होंने यह भी दावा किया कि अगर केंद्र की राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) सरकार चाहती तो रिहाई संभव नहीं होती।
मांझी ने रिहाई पर जताई प्रतिक्रिया
गया में शनिवार को आयोजित कार्यक्रम में मांझी ने कहा कि केजरीवाल की रिहाई न्यायिक प्रक्रिया के तहत हुई है और इसे राजनीतिक साजिश से जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी व्यक्ति का साक्ष्यों की कमी के आधार पर बरी होना यह साबित नहीं करता कि उस पर लगाए गए आरोप निराधार थे। मांझी ने कहा कि केजरीवाल पर गंभीर आरोप लगे थे और चार्जशीट दाखिल की गई थी। जांच एजेंसियों ने तथ्यों के आधार पर कार्रवाई की और मामले की सुनवाई अदालत में हुई। अदालत ने उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर फैसला सुनाया। मांझी ने इस मामले को देश की न्याय व्यवस्था की मजबूती का उदाहरण बताया और कहा कि अदालतें स्वतंत्र रूप से फैसले लेती हैं।
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मांझी ने कहा कि केजरीवाल और मनीष सिसोदिया को भारत सरकार का धन्यवाद देना चाहिए। उनका दावा था कि यदि NDA सरकार चाहती, तो वे जेल से बाहर नहीं आ पाते। उन्होंने यह भी कहा कि NDA सरकार ने कभी न्यायपालिका के कामकाज में हस्तक्षेप नहीं किया और उसकी स्वतंत्रता तथा गरिमा को अक्षुण्ण रखा।
राजनीतिक हलकों में चर्चा
मांझी के बयान के बाद बिहार और राष्ट्रीय राजनीति में नई बहस छिड़ गई। विपक्षी दल इसे राजनीतिक बयानबाजी बता रहे हैं, जबकि मांझी ने इसे अपनी व्यक्तिगत और राजनीतिक राय बताया। राज्यसभा सीट से जुड़े सवाल पर मांझी ने किसी भी प्रकार की नाराजगी से इनकार किया। उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी को पहले दो लोकसभा और एक राज्यसभा सीट देने का आश्वासन मिला था। लोकसभा चुनाव में उन्हें एक सीट मिली, जिस पर उनकी पार्टी ने जीत हासिल की और वे केंद्रीय मंत्री बने। मांझी ने यह भी कहा कि यह वादा “पत्थर की लकीर” नहीं था, इसलिए वे इस मुद्दे को समय-समय पर उठाते रहेंगे।
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