उत्तराखंड की राजनीति में उत्तराखंड क्रांति दल (उक्रांद) का खास योगदान रहा है। राज्य आंदोलन से निकलकर यह दल राज्य की अस्मिता, स्थानीय अधिकारों और विकास के संतुलन के मुद्दों पर ध्यान केंद्रित करता आया है। हालांकि वर्षों तक राष्ट्रीय पार्टियों के दबाव और संसाधनों की कमी के कारण यूकेडी अपनी राजनीतिक पकड़ मजबूत नहीं कर पाई लेकिन डिजिटल मीडिया के माध्यम से संगठन को फिर जिंदा कर अपनी पहचान वापस पा रही है। सक्रिय नेता और युवा चेहरे के तौर पर बूथ स्तर से संगठनात्मक मजबूती, सदस्यता अभियान व डिजिटल-अभियानों के माध्यम से पार्टी को नई ऊर्जा देने का काम कर रहे उक्रांद युवा प्रकोष्ठ के केंद्रीय अध्यक्ष आशीष नेगी से अमर उजाला के उप संपादक दीपक सिंह नेगी की विशेष बातचीत के कुछ अंश…
सवाल 1: आगामी विधानसभा चुनाव के लिए आपकी रणनीति क्या है?
चुनाव बूथ से जीते जाते हैं। प्रदेश के करीब 11,500 बूथों में से 3,500 पर सदस्यता अभियान पूरा हो चुका है और बाकी बूथों पर अध्यक्ष और प्रभारी नियुक्त किए जा रहे हैं। पहले संगठन की सबसे बड़ी कमजोरी बूथ स्तर पर थी और युवा व वरिष्ठ नेतृत्व के बीच एक बड़ा अंतर था। कुमाऊं दौरे के दौरान जमीनी हकीकत का आकलन कर रहे हैं। हमारा लक्ष्य कम से कम 11,000 समर्पित कार्यकर्ताओं की टीम तैयार करना है जो अपने-अपने बूथों की जिम्मेदारी संभालें।
सवाल 2: भू-कानून, मूल निवास और गैरसैंण जैसे मुद्दों पर आपका स्पष्ट रोडमैप क्या है?
भू-कानून और मूल निवास का प्रश्न उत्तराखंड की अस्मिता से जुड़ा है। हम इसे केवल भावनात्मक मुद्दा नहीं मानते बल्कि यह संरचनात्मक बदलाव का विषय है। जहां तक गैरसैंण का सवाल है उसे केवल प्रतीकात्मक रूप में देखना गलत है। राज्य की राजधानी राज्य के मध्य में होगी तो विकास संतुलित तरीके से होगा। हमारा उद्देश्य भावनात्मक राजनीति करना नहीं बल्कि ऐसी नीतियां बनाना है जिससे जल, जंगल और जमीन पर स्थानीय लोगों का अधिकार सुनिश्चित हो और पलायन रुके।
सवाल 3: सोशल मीडिया पर आपकी सक्रियता और पोस्ट काफी वायरल होती हैं। इसे वोट में कैसे बदलेंगे?
सोशल मीडिया आज की राजनीति का अहम माध्यम है लेकिन केवल पोस्ट डाल देना ही राजनीति नहीं है। हम जो बात सोशल मीडिया पर रखते हैं, उसी मुद्दे को लेकर मैदान में भी उतरते हैं। पोस्ट के बाद संवाद, बैठकें और बूथ स्तर की सक्रियता सुनिश्चित की जाती है। संसाधनों की कमी जरूर है लेकिन जनता का समर्थन और कार्यकर्ताओं की प्रतिबद्धता हमारी सबसे बड़ी ताकत है और यही सब वोट में बदलेगा।
सवाल 4 : उत्तराखंड क्रांति दल पर जनता राजनीतिक दृष्टि से विश्वास क्यों नहीं कर पाई है।
इसमें कोई दो राय नहीं है कि हमने राज्य गठन में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। 25 साल में भाजपा-कांग्रेस ने इस राज्य के मूल निवासियों व इस राज्य की परिधि में रहने वाले लोगों की स्थिति ऐसी कर दी है कि उसके हाथ में सोने का कटोरा है और वह भीख मांग रहा है। राष्ट्रीय पार्टियों ने यहां के लोगों को बरगलाया है। आज अल्प समय में भी कार्यक्रम में लोग जुट रहे हैं। ये राष्ट्रीय पार्टियों ने वर्षों से जो दमन किया है उसकी पीड़ा निकलकर आ रही है। लोग समझ चुके हैं कि राज्य के असली दुश्मन दोनों राष्ट्रीय दल हैं।
सवाल 5 : राज्य के लिए भाजपा-कांग्रेस भी उतनी ही पुरानी पार्टी हैं जितनी उक्रांद। लोगों ने जितना इन दलों को स्वीकारा, उतना आपकी पार्टी को नहीं।
हम आंदोलनकारी दल थे। राज्य बनाना हमारा सपना था। उस वक्त हम चुनाव के लिए तैयार नहीं थे। पहले चुनाव में चार सीटें जीतने के बाद हमारा प्रदर्शन गिरता रहा। इन दलों के पास संसाधन और मीडिया था। जब से डिजिटल मीडिया आया हमारी आवाज लोगों तक पहुंच पा रही है। ये जरिया नहीं होता तो आज भी स्वीकार्यता नहीं मिलती। आज लोगों के दिल में एक बार फिर उक्रांद के लिए जगह बनी है।
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