श्री चिंतामण गणेश मंदिर में चैत्र मास के दौरान विशेष जत्रा आयोजित किए जाने की परंपरा निभाई जाती है। पहली जत्रा बुधवार से शुरू हुई। प्रसिद्ध चिंतामण गणेश मंदिर में होने वाली जत्रा का विशेष महत्व है। यहां प्रति वर्ष चैत्र माह के बुधवार को जत्रा का आयोजन होता है। इसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु मंदिर में दर्शन के लिए पहुंचते हैं। मान्यता है कि जत्रा के दौरान भगवान गणेश जी के दर्शन से सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं। इस दौरान किसान अपनी फसल भगवान को अर्पित करने भी पहुंचते हैं। चैत्र माह के पहले बुधवार को जत्रा के आयोजन पर सुबह 4 बजे पट खुलते ही भगवान श्री गणेश का पंचामृत अभिषेक कर भव्य श्रृंगार किया गया। जत्रा को लेकर सुबह से ही मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ने लगी थी। अनुमान है कि देर शाम शयन आरती तक हजारों भक्त दर्शन लाभ के लिए पहुंचेंगे। इस बार कुल पांच जत्राएं होंगी, जो क्रमशः 11 मार्च, 18 मार्च, 25 मार्च और 1 अप्रैल को आयोजित की जाएंगी। इस दौरान बड़ी संख्या में भक्त चिंतामण मंदिर पहुंचकर भगवान गणेश का आशीर्वाद लेंगे। भक्तों की भीड़ को देखते हुए प्रशासन ने सहज दर्शन व्यवस्था के लिए विशेष इंतजाम किए हैं। उज्जैन में चैत्र मास के हर बुधवार को आयोजित होने वाली भगवान श्री चिंतामण गणेश की जत्रा का समापन 1 अप्रैल को होगा। जत्रा से जुड़ी मान्यताएं मंदिर के पुजारी जयंत शर्मा के मुताबिक, चैत्र मास की शाही जत्रा में भगवान चिंतामण गणेश के दरबार में श्रद्धालु अपनी मनोकामनाएं लेकर पहुंचते हैं। मान्यता है कि इस दिन की गई प्रार्थना अवश्य फल देती है। एक मान्यता यह भी है कि इस समय क्षेत्र में गेहूं और चने की फसल पक चुकी होती है। किसान अपनी नई उपज को बेचने से पहले भगवान को समर्पित करते हैं। इसी विश्वास के साथ वे शाही जत्रा में भाग लेते हैं।
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