राजस्थान की इस दूसरी सबसे बड़ी डिजिटल लाइब्रेरी ने खुद को ‘स्मार्ट’ बनाने के लिए आरएफआईडी (RFID) ऑटोमेशन सिस्टम को अपना लिया है। इसके लिए 18 लाख की लागत से पांच अत्याधुनिक मशीनें लगाई गई हैं।
उदयपुर में अशोक नगर स्थित नगर निगम की ई-पब्लिक लाइब्रेरी अब पूरी तरह बदल गई है। राजस्थान की इस दूसरी सबसे बड़ी डिजिटल लाइब्रेरी ने खुद को ‘स्मार्ट’ बनाने के लिए आरएफआईडी (RFID) ऑटोमेशन सिस्टम को अपना लिया है। इसके लिए 18 लाख की लागत से पांच अत्याधुनि
यह तकनीक आने वाले समय में छात्रों और शोधकर्ताओं के पढ़ने के अंदाज को पूरी तरह बदल देगी। अब यहां पुरानी फाइलों और कागजी कार्रवाई का दौर खत्म हो गया है और उसकी जगह अत्याधुनिक मशीनों ने ले ली है। लाइब्रेरी के इस कायाकल्प में रैपिड रेडियो कंपनी के सिस्टम और ‘सोल’ (SOUL) लाइब्रेरी सॉफ्टवेयर का मेल किया गया है।
पुस्तकालयाध्यक्ष राव भगवत सिंह ने बताया कि अब लाइब्रेरी में एंट्री से लेकर किताब घर ले जाने तक का सारा काम ऑटोमेटिक होगा। जब कोई छात्र लाइब्रेरी में कदम रखेगा, तो उसे किसी रजिस्टर में नाम लिखने की जरूरत नहीं पड़ेगी।
गेट पर लगे डिजिटल रीडर छात्र के आरएफआईडी कार्ड को खुद स्कैन कर लेंगे और उनकी हाजिरी लग जाएगी। इससे न केवल समय बचेगा, बल्कि सुरक्षा भी मजबूत होगी।
इस लाइब्रेरी का उद्घाटन साल 2022 में हुआ था, लेकिन मशीनें उपलब्ध नहीं होने के कारण इसे डिजिटल रूप में शुरू नहीं किया जा सका। करीब 5 माह पहले सभी मशीनें लाइब्रेरी पहुंचीं। फिलहाल रोजाना 50 से 60 स्टूडेन्ट्स अध्ययन के लिए आ रहे हैं, जबकि इसके 500 सदस्य हैं। लाइब्रेरी के ग्राउंड फ्लोर पर 50 और फ्स्ट फ्लोर तल पर 100 पाठकों के बैठने की कैपिसिटी है। मेंबर बनने के लिए 5 रुपए का फॉर्म शुल्क निर्धारित है।
लाइब्रेरी में 8 से 10 करोड़ ई-बुक्स ऑनलाइन और 40 हजार से अधिक फिजिकल किताबें उपलब्ध हैं। सभी पुस्तकों पर एंटी-थेफ्ट स्टीकर और लाइब्रेरी की पहचान अंकित है।
किताबों की सुरक्षा के लिए यहां खास इंतजाम किए गए हैं। हर किताब में एक विशेष आरएफआईडी टैग लगाया गया है। अगर कोई बिना एंट्री कराए किताब बाहर ले जाने की कोशिश करेगा, तो गेट पर लगा अलार्म तुरंत बज उठेगा। इससे लाइब्रेरी की कीमती किताबों की चोरी रुक सकेगी। वहीं, छात्रों की सुविधा के लिए सेल्फ-सर्विस कियॉस्क लगाए गए हैं। यहां छात्र बिना किसी कर्मचारी की मदद के खुद ही जान सकेंगे कि उनके नाम पर कौन सी किताब है, कब लौटानी है या कितना जुर्माना बाकी है।
सबसे खास सुविधा 24 घंटे काम करने वाला ‘ड्रॉप बॉक्स’ है। अक्सर छात्र लाइब्रेरी बंद होने के बाद किताबें नहीं लौटा पाते थे, जिससे उन पर पेनल्टी लगती थी। अब वे दिन हो या रात, कभी भी अपनी किताब इस ऑटोमेटेड बॉक्स में डाल सकते हैं।
सिस्टम अपने आप किताब को जमा कर लेगा और छात्र के खाते को अपडेट कर देगा। हर लेनदेन के बाद छात्र को मशीन से तुरंत रसीद भी मिलेगी, जिससे पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता बनी रहेगी। उदयपुर की यह लाइब्रेरी अब तकनीकी मामले में प्रदेश के सबसे उन्नत सार्वजनिक केंद्रों में शामिल हो गई है।
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