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यह स्थिति शिक्षा विभाग की अनदेखी और प्रशासनिक उदासीनता को उजागर करती है। जब इस संबंध में जिम्मेदार अधिकारियों से सवाल किया गया तो उनका कहना है कि स्कूल भवन निर्माण के लिए राशि स्वीकृत हो चुकी है और निर्माण सामग्री भी भेज दी गई है, लेकिन ज़मीनी हकीकत में निर्माण कार्य शुरू नहीं हुआ है। गांव में पेयजल की भी गंभीर समस्या है। नलों में पानी नहीं आता और स्थायी जलस्रोत की व्यवस्था नहीं है। इसी वजह से कई परिवार रोजगार की तलाश में महाराष्ट्र, कर्नाटक सहित अन्य राज्यों में पलायन कर चुके हैं, जिनके घरों में ताले लटके हुए हैं।
चौंकाने वाली बात यह है कि ग्राम पंचायत से लेकर विधायक और सांसद तक आदिवासी वर्ग से होने के बावजूद यह क्षेत्र बुनियादी सुविधाओं से वंचित है। बेतूल-हरदा सांसद दुर्गा प्रसाद उइके, टिमरनी विधायक अभिजीत शाह तथा अन्य जनप्रतिनिधियों के क्षेत्र में आने के बाद भी ग्राम बारानाला के आदिवासी बच्चों को आज तक पक्की स्कूल इमारत और मूलभूत सुविधाएं नसीब नहीं हो सकीं। ग्रामीणों ने शीघ्र स्कूल भवन निर्माण, सड़क और पेयजल व्यवस्था की मांग की है।
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