गर्मी की छुट्टियां शुरू होने से पहले ही लोग सुकून भरी जगहों की तलाश में जुट जाते हैं. अगर आप इस सीजन में झारखंड के पलामू आने की योजना बना रहे हैं, तो एक ऐसी जगह है जिसे बिल्कुल मिस नहीं करना चाहिए. प्रकृति के अनोखे रंगों से सजी यह जगह इन दिनों पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र बनी हुई है.
पत्तों के झड़ने के बाद जब टहनियों पर गहरे नारंगी रंग के फूल खिलते हैं, तो पूरा जंगल मानो धधकती आग की तरह दिखाई देता है. इसी कारण पलास को जंगल की आग या फॉरेस्ट फायर भी कहा जाता है. दूर से देखने पर ऐसा लगता है जैसे धरती पर आग की चादर बिछ गई हो.
प्रकृति का अद्भुत रूप
जिला मुख्यालय से करीब 20 किलोमीटर पूर्व दिशा में स्थित कुंदरी लाह बगान लगभग 421 एकड़ क्षेत्र में फैला हुआ है. यहां एक साथ तीन लाख से अधिक पलास के पेड़ मौजूद हैं. इन दिनों सभी पेड़ों पर फूल खिल चुके हैं, जिससे पूरा इलाका नारंगी आभा से जगमगा रहा है. सड़क से गुजरने वाले लोग इस दृश्य को देखकर रुक जाते हैं और मोबाइल में तस्वीरें व वीडियो कैद करने लगते हैं. घंटों यहां बैठकर प्रकृति के इस अद्भुत रूप को निहारने का मन करता है.
पेड़ों की छांव में ठंडक का एहसास
स्थानीय निवासी श्रवण कुमार, जो लेस्लीगंज क्षेत्र के रहने वाले हैं, बताते हैं कि कभी यह इलाका एशिया में लाह उत्पादन के लिए प्रसिद्ध था. आज भी झारखंड स्टेट लाइवलीहुड प्रमोशन सोसाइटी के माध्यम से यहां लाह उत्पादन का कार्य किया जाता है. लाह बगान की पहचान केवल उत्पादन तक सीमित नहीं है, बल्कि यह प्राकृतिक सौंदर्य का भी अनमोल खजाना है.कड़ी धूप के बावजूद यहां पेड़ों की छांव में ठंडक का एहसास होता है. परिवार और युवा पर्यटक यहां पिकनिक जैसा आनंद लेते हैं. अगर आप प्रकृति के रंगों को करीब से महसूस करना चाहते हैं, तो इस गर्मी कुंदरी लाह बगान की सैर जरूर करें. यहां का नजारा आपके सफर को यादगार बना देगा.
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