किऊल–जसीडीह रेलखंड पर शनिवार रात 11.40 बजे मालगाड़ी डिरेल हो गई। बड़ुआ नदी पर बने रेलवे पुल के जोड़ के पास पटरी में पहले से आई दरार के बावजूद कई यात्री ट्रेनें उसी ट्रैक से गुजरती रहीं।
सबसे चौंकाने वाली बात ये रही कि मालगाड़ी के डिरेल होने से महज 30 मिनट पहले पूर्वांचल एक्सप्रेस उसी क्षतिग्रस्त पटरी से सुरक्षित निकल गई। यदि उस वक्त हादसा हो जाता, तो सैकड़ों यात्रियों की जान खतरे में पड़ सकती थी।
दरार वाली पटरी से गुजरीं यात्री ट्रेनें
रेलवे सूत्रों के अनुसार, बड़ुआ नदी पर बने रेलवे ब्रिज संख्या 676 के जिस हिस्से में ट्रैक का जोड़ है, वहीं पहले से दरार मौजूद थी। रात करीब 10:35 बजे अप लाइन से रक्सौल–हावड़ा मिथिला एक्सप्रेस (13021) उसी पटरी से गुजरी। रात लगभग 11:00 बजे डाउन लाइन से पूर्वांचल एक्सप्रेस (15050) भी उसी ट्रैक से सुरक्षित निकल गई।
इन दोनों यात्री ट्रेनों के गुजरने के बाद भी पटरी की स्थिति पर तत्काल कोई रोक नहीं लगाई गई।
सीमेंट लदी मालगाड़ी डिरेल, 17 बोगियां बेपटरी
शनिवार रात करीब 11:10 बजे पश्चिम बंगाल से सीतामढ़ी जा रही सीमेंट लदी मालगाड़ी जब जसीडीह की ओर से सिमुलतला दिशा में पुल पार कर रही थी, तभी ट्रैक अचानक टूट गया। इंजन से सटी 17 बोगियां एक-एक कर बेपटरी होती चली गईं।
हादसा इतना भीषण था कि 8 बोगियां सीधे बड़ुआ नदी में गिर गईं। 9 बोगियां रेलवे पुल पर ही पलट गईं। कुछ बोगियां पुल और नदी के बीच लटक गईं। इस दुर्घटना में अप और डाउन, दोनों ट्रैक पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गए।
लोको पायलट और गार्ड बाल-बाल बचे
मालगाड़ी के लोको पायलट कमलेश कुमार तृतीय और गार्ड मुकेश कुमार पासवान इस हादसे में बाल-बाल बच गए। लोको पायलट ने बताया कि पुल पर चढ़ते ही पीछे से तेज धमाके की आवाज आई और कुछ ही सेकेंड में बोगियां डिरेल होने लगीं। उन्होंने तुरंत इसकी सूचना सिमुलतला स्टेशन प्रबंधक को दी।
रेल परिचालन ठप, बहाली कार्य युद्धस्तर पर
हादसे के बाद जसीडीह–किऊल रेलखंड पर अप और डाउन दोनों लाइनों पर रेल परिचालन पूरी तरह ठप हो गया। कई ट्रेनों को जसीडीह, झाझा और आसपास के स्टेशनों पर रोक दिया गया।दुर्घटनाग्रस्त बोगियों को हटाने के लिए मौके पर 2 भारी क्रेन, 4 जेसीबी मशीनें और बड़ी संख्या में रेलवे कर्मियों को लगाया गया है।
सबसे पहले सीमेंट से लदी बोगियों को खाली किया जा रहा है, ताकि उन्हें हटाया जा सके। समाचार लिखे जाने तक एक भी बोगी पूरी तरह ट्रैक से नहीं हटाई जा सकी थी।
डीआरएम मौके पर, कारणों पर चुप्पी
आसनसोल रेल मंडल की डीआरएम विनीत श्रीवास्तव स्वयं घटनास्थल पर मौजूद रहीं और बहाली कार्य की निगरानी करती रहीं। हालांकि, हादसे के मूल कारणों को लेकर पूछे गए सवालों पर रेल प्रशासन की ओर से कोई स्पष्ट बयान नहीं दिया गया। देर रात तक यह स्पष्ट नहीं हो सका कि पटरी में दरार की समय पर पहचान क्यों नहीं हुई।
धारा 144 लागू, सुरक्षा के कड़े इंतजाम
सुरक्षा को देखते हुए घटनास्थल पर धारा 144 लागू कर दी गई है। मौके पर झाझा बीडीओ, सीओ, जमुई एसपी विश्वजीत दयाल, एसडीएम, रेलवे डीएसपी, जीआरपी, आरपीएफ, एसएसबी और स्थानीय पुलिस बल तैनात है।
तेज धमाके से दहशत में ग्रामीण
डिरेलमेंट के दौरान हुए तेज धमाके से आसपास के गांवों में दहशत फैल गई। स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि रात के सन्नाटे में जोरदार आवाज सुनकर जब वे बाहर निकले, तो देखा कि पुल पर मालगाड़ी की बोगियां बिखरी पड़ी थीं।



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