सर्दी आने पर गुड़हल के पौधे के पत्ते पीले पड़ने और कलियां झड़ने की समस्या आम है. सही देखभाल, धूप, पानी के संतुलन के साथ एक आसान घरेलू नुस्खा अपनाकर पौधे को सूखने से बचाया जा सकता है. उचित ध्यान देने पर यह पौधा सालभर बड़े और आकर्षक फूल दे सकता है.
मौसम बदलने पर या सर्दियों में गुड़हल का पौधा अक्सर सूखने लगता है, पत्तियां पीली पड़ जाती हैं और कलियां झड़ने लगती हैं. इससे बागवान परेशान हो जाते हैं, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि थोड़ा-सा ध्यान और एक बेहद आसान घरेलू नुस्खा अपनाकर पौधे को फिर से हरा-भरा किया जा सकता है. सही देखभाल, धूप, पानी और मिट्टी का संतुलन मिलते ही गुड़हल दोबारा पहले जैसा खिल उठता है और बड़े-बड़े फूल देने लगता है.

गुड़हल को ‘फूलों का राजा’ कहा जाता है, क्योंकि इसके बड़े, आकर्षक और लगातार खिलते फूल किसी भी बगीचे की खूबसूरती बढ़ा देते हैं. भारतीय घरों में इसकी खास लोकप्रियता है. परंतु जब यह सूखने लगता है या बढ़वार रुक जाती है, तो पौधा जल्दी संभल नहीं पाता. ऐसे समय गार्डनिंग विशेषज्ञों की सलाह मानकर पौधे को नया जीवन दिया जा सकता है. गुड़हल उचित देखभाल मिलने पर सालभर फूल देने में सक्षम होता है.

गार्डनिंग एक्सपर्ट कौशल किशोर जायसवाल बताते हैं कि गुड़हल को दोबारा फूलों से भरने के लिए किसी महंगे उर्वरक की जरूरत नहीं. सिर्फ घर में बची हुई चायपत्ती यानी एक ‘फ्री का नुस्खा’ पौधे में नई जान डाल देता है. यह जैविक खाद मिट्टी को पौष्टिक बनाती है और पौधे को तेजी से फूलने की क्षमता देती है. सही उपयोग से गुड़हल न सिर्फ स्वस्थ होता है, बल्कि फूलों का आकार भी बड़ा और चमकीला बनता है.
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आगे कहा कि गुड़हल के सूखने, पत्ती मुरझाने या पीली होने का मुख्य कारण जड़ों में पानी भर जाना है. जब मिट्टी दलदली बनी रहती है तो जड़ों को ऑक्सीजन नहीं मिलती और वे गलने लगती हैं. इसलिए पौधे को तभी पानी दें, जब ऊपरी 1–2 इंच मिट्टी सूखी महसूस हो. अच्छी ड्रेनेज वाली मिट्टी का उपयोग करें और गमले के नीचे पानी निकासी के छेद जरूर हों. सही सिंचाई पौधे की ग्रोथ और फूल आने के लिए सबसे जरूरी है.

उन्होंने कहा कि गुड़हल में फूल तभी अच्छी संख्या में आते हैं, जब समय-समय पर उसकी कटाई-छंटाई की जाए. साल में एक–दो बार कठोर छंटाई से पौधा नया और ताजा उगने लगता है. वहीं फूलों के मौसम में हल्की छंटाई करने से नई टहनियाँ निकलती हैं, जिन पर अधिक कलियां बनती हैं. मुरझाए फूल और सूखी टहनियाँ हटाना आवश्यक है. इससे पौधा झाड़ीदार होकर अधिक और बड़े फूल देने लगता है.

उन्होंने कहा कबगुड़हल को रोज 4 से 5 घंटे की सीधी धूप चाहिए. धूप कम मिले तो फूल छोटे हो जाते हैं या खिलते ही नहीं. इसलिए पौधे को ऐसी जगह रखें जहां सुबह या दोपहर की रोशनी मिले. साथ ही गुड़हल पर अक्सर मिलीबग्स हमला करते हैं. इससे बचाव के लिए नीम के तेल या नीम की पत्तियों का छिड़काव करें. यह पौधे को कीटों से बचा कर स्वस्थ रखता है और नई कली बनने में मदद करता है.

उन्होंने बताया कि माली द्वारा सुझाई गई ‘फ्री की चीज’ है इस्तेमाल की हुई चायपत्ती. इसमें नाइट्रोजन, फॉस्फोरस और पोटाश जैसे तत्व होते हैं, जो गुड़हल के लिए बेहतरीन खाद का काम करते हैं. यह मिट्टी को हल्का अम्लीय बनाती है, जो गुड़हल की पसंदीदा स्थिति है. इस्तेमाल की हुई चायपत्ती को दो बार धोकर मिट्टी में मिलाने से पौधे की ग्रोथ तेज होती है और कलियां अधिक बनती हैं. यह पूरी तरह जैविक और सुरक्षित तरीका है.

उन्होंने यह भी कहा कि टी बैग हों या बची हुई चायपत्ती—दोनों का उपयोग किया जा सकता है, चायपत्ती में मौजूद दूध और चीनी फंगस पैदा कर सकते हैं, इसलिए इसे पहले अच्छी तरह धोना जरूरी है. धुली हुई चायपत्ती को महीने में एक बार मिट्टी में मिलाएं या गमले की सतह पर डाल दें. पौधे की नमी और धूप का ध्यान रखते हुए इसका नियमित उपयोग गुड़हल को कुछ ही सप्ताह में फिर से फूलों से भर देता है
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