जिला अस्पताल जांजगीर के आयुष चिकित्सक डॉ. पी.बी. दीवान ने बताया कि सर्दियों में त्वचा खासकर पैरों के नीचे की मोटी त्वचा अपनी प्राकृतिक नमी खो देती है, पैरों के तलवे और एड़ी का हिस्सा मोटा होता है, और जैसे-जैसे ठंड बढ़ती है, यह मोटी त्वचा सूखकर फटने लगती है, इस स्थिति को आम भाषा में बेवाई या पैर फटना कहा जाता है, जो सही देखभाल न होने पर दर्दनाक हो सकता है.
डॉ. दीवान ने बताया की एड़ियों को फटने से बचाने के लिए सबसे जरूरी और खास बात है नमी बनाए रखना. इसमें वैसलीन, ग्लिसरीन या किसी भी प्राकृतिक तेल का नियमित उपयोग बेहद प्रभावी होता है. उन्होंने बताया कि रात में सोने से पहले एड़ी पर वैसलीन या ग्लिसरीन लगाकर हल्की मालिश करनी चाहिए, यह त्वचा को मुलायम बनाता है और फटी एड़ियों को जल्दी ठीक करता है. अगर एड़ियां बहुत ज्यादा फट चुकी हों, तो वैसलीन का अधिक उपयोग लाभकारी है.
उन्होंने घरेलू उपायों के बारे में बताया कि रात के समय गुनगुने पानी में थोड़ा सा नमक डालकर 10–15 मिनट तक पैर भिगोना बहुत फायदेमंद होता है, इससे पैरों की सख्त त्वचा नरम होती है और दरारें भरने में तेजी आती है, इसके बाद नारियल या सरसों का तेल लगाकर मोजे पहनने से त्वचा में नमी लंबे समय तक बनी रहती है.
डॉ. दीवान ने कहा कि कई लोग सर्दियों में घर पर पैर खुले रखते हैं, जिससे एड़ियां तेजी से सूखती हैं, पैरों को ढककर रखने और हल्की गर्माहट देने से त्वचा की नमी और स्वाभाविक पसीना बना रहता है, जो सर्दियों में फटी एड़ियों से बचाव के लिए बेहद आवश्यक है. और कहा कि लोगों को हर साल यह समस्या होती है. उन्हें ठंड शुरू होते ही पैरों की देखभाल पर विशेष ध्यान देना चाहिए, ताकि दरार आने की स्थिति ही न बने. नियमित मॉइस्चराइजिंग, पैरों को साफ-सुथरा रखना और ठंड से बचाना ही इस समस्या का सबसे सरल समाधान है.
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