विश्व प्रसिद्ध बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व की पनपथा रेंज अंतर्गत ग्राम चिल्हारी गडरिया हार में बीते एक सप्ताह से डेरा जमाए बाघिन को आखिरकार वन विभाग ने सुरक्षित रेस्क्यू कर लिया। लंबे समय से गांव के आसपास बाघिन की मौजूदगी से ग्रामीणों में दहशत का माहौल था। लगातार निगरानी और रणनीतिक प्रयासों के बाद वन विभाग की टीम को इस अभियान में सफलता मिली।
प्राप्त जानकारी के अनुसार बाघिन बीते कई दिनों से गांव से सटे इलाके में विचरण कर रही थी। मवेशियों पर हमले की आशंका और ग्रामीणों की सुरक्षा को देखते हुए वन विभाग ने तत्काल क्षेत्र को संवेदनशील घोषित किया। गांव में मुनादी कराई गई, लोगों को रात के समय घरों से बाहर न निकलने की सख्त हिदायत दी गई और खेतों की ओर जाने पर भी रोक लगाई गई।
रेस्क्यू अभियान के दौरान वन विभाग की टीम ने हाथी दल, ट्रैंकुलाइजिंग विशेषज्ञों और फील्ड स्टाफ की मदद ली। पूरे क्षेत्र को घेराबंदी कर नियंत्रित किया गया ताकि बाघिन को बिना नुकसान पहुंचाए सुरक्षित पकड़ा जा सके। कई घंटे की मशक्कत के बाद बाघिन को ट्रैंकुलाइज कर सुरक्षित पिंजरे में लिया गया। इसके बाद उसे स्वास्थ्य परीक्षण के लिए निर्धारित स्थान पर भेजा गया।
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वन अधिकारियों ने बताया कि रेस्क्यू की गई बाघिन पूरी तरह स्वस्थ है। प्रारंभिक जांच के बाद उसे सुरक्षित जंगल क्षेत्र में छोड़े जाने की प्रक्रिया की जाएगी, ताकि वह अपने प्राकृतिक आवास में वापस लौट सके। अधिकारियों ने यह भी स्पष्ट किया कि बाघिन ने अब तक किसी मानव पर हमला नहीं किया था लेकिन एहतियातन यह कदम उठाया गया।
रेस्क्यू के बाद ग्रामीणों ने राहत की सांस ली। गांव के लोगों ने वन विभाग के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि समय रहते कार्रवाई नहीं होती तो बड़ा हादसा हो सकता था। वन विभाग ने ग्रामीणों से अपील की है कि भविष्य में भी जंगली जानवरों की मौजूदगी की सूचना तुरंत विभाग को दें और स्वयं किसी तरह का जोखिम न उठाएं।
यह अभियान वन विभाग की तत्परता और वन्यजीव संरक्षण के प्रति प्रतिबद्धता का उदाहरण माना जा रहा है, जिससे मानव और वन्यजीवों के बीच संतुलन बनाए रखने में मदद मिलेगी।
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