घटना की सूचना मिलते ही वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची और प्रारंभिक जांच शुरू की गई। जांच में यह स्पष्ट हुआ कि बाघ की मौत करंट की चपेट में आने से हुई है। आशंका जताई गई कि शिकार के उद्देश्य से जंगल में अवैध रूप से बिजली का तार बिछाया गया था, जिसकी चपेट में आकर बाघ की जान चली गई। मामले की गंभीरता को देखते हुए वरिष्ठ वन अधिकारियों को तत्काल अवगत कराया गया।
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इसके बाद वन विभाग ने डॉग स्क्वाड की मदद से सघन तलाशी अभियान चलाया। जांच के दौरान तकनीकी साक्ष्य और स्थानीय सूचनाओं के आधार पर संदिग्धों की पहचान की गई। वन विभाग की टीम ने अलग-अलग स्थानों पर दबिश देकर छह आरोपियों को गिरफ्तार किया। गिरफ्तार किए गए आरोपियों में अशोक बैगा, सोमलाल बैगा, लखुआ बैगा, लक्कू कोल, अंजनी यादव और अच्छे लाल बैगा शामिल हैं।
अनुविभागीय अधिकारी वन कुलदीप त्रिपाठी ने बताया कि सभी आरोपियों से पूछताछ की जा रही है और मामले से जुड़े अन्य पहलुओं की भी जांच की जा रही है। उन्होंने कहा कि यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि अवैध करंट किस उद्देश्य से लगाया गया था और इसमें और कौन-कौन लोग शामिल हो सकते हैं। आरोपियों के खिलाफ वन्यजीव संरक्षण अधिनियम सहित अन्य संबंधित धाराओं के तहत कार्रवाई की जा रही है। वन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि बाघ जैसे संरक्षित वन्यप्राणी की मौत बेहद गंभीर अपराध है। भविष्य में ऐसी घटनाएं न हों, इसके लिए गश्त बढ़ाने और संवेदनशील क्षेत्रों में निगरानी मजबूत करने के निर्देश दिए गए हैं।
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