बैतूल के सोनाघाटी क्षेत्र स्थित शमशेर सिंह भोसले नगर, जिसे स्थानीय तौर पर पारधी ढाना कहा जाता है, में रह रहे विस्थापित पारधी समाज के परिवार भीषण ठंड में खुले आसमान के नीचे जीवन बिताने को मजबूर हैं। न तो इनके पास स्थायी आवास है और न ही ठंड से बचाव के
ठंड में कांपते बच्चे और बुजुर्ग रात के समय तापमान में भारी गिरावट के कारण महिलाएं, बुजुर्ग और छोटे बच्चे सड़क किनारे ठिठुरते हुए रात गुजारने को मजबूर हैं। कई परिवार तंबू और पुराने कपड़ों के सहारे किसी तरह ठंड से बचने की कोशिश कर रहे हैं।
इस गंभीर स्थिति को देखते हुए पारधी समाज के प्रतिनिधियों ने बुधवार को बैतूल कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर तत्काल राहत और मानवीय सहायता की मांग की। ज्ञापन में बताया गया कि अत्यधिक ठंड के कारण समाज के परिवार गंभीर संकट में हैं और किसी भी समय अप्रिय घटना हो सकती है।

पहले भी जा चुकी हैं जानें ज्ञापन में यह भी उल्लेख किया गया कि पिछले वर्ष बरसात के मौसम में आश्रय के अभाव में दो लोगों की मौत हो चुकी है, लेकिन इसके बावजूद अब तक कोई स्थायी व्यवस्था नहीं की गई। स्थानीय लोगों का कहना है कि अलाव और जलाऊ लकड़ी की मांग को लेकर ग्राम पंचायत सचिव से कई बार गुहार लगाई गई, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई।
2007 से विस्थापन, सुविधाएं अधूरी पारधी समाज के मुखिया अलस्या पारधी ने बताया कि वर्ष 2007 में उनके परिवारों को बैतूल में विस्थापित किया गया था। पहले वे उत्कृष्ट विद्यालय ग्राउंड में झोपड़ियां बनाकर रहते थे। बाद में प्रशासन द्वारा सोनाघाटी क्षेत्र में 600-600 वर्गफुट के प्लॉट दिए गए।
कुल 96 परिवारों को प्लॉट और दो ट्यूबवेल तो मिले, लेकिन बिजली, सड़क, आवास और अन्य बुनियादी सुविधाएं आज तक नहीं दी गईं।

तत्काल राहत की मांग पारधी समाज ने प्रशासन से मांग की है कि खुले में रह रहे परिवारों के लिए तुरंत अलाव, जलाऊ लकड़ी, कंबल और अस्थायी आश्रय की व्यवस्था की जाए, ताकि ठंड से राहत मिल सके और किसी भी तरह की जनहानि को रोका जा सके।
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