जीवाजी यूनिवर्सिटी (जेयू) द्वारा जारी की गई सरकारी कॉलेजों के प्रोफेसरों की वर्ष 2026 की सीनियरिटी (वरिष्ठता) सूची में गंभीर लापरवाही सामने आई है। विश्वविद्यालय प्रशासन ने ऐसी सूची जारी कर दी, जिसमें कई दिवंगत और सेवानिवृत्त प्रोफेसरों के नाम दर्ज हैं। इस गलती से न केवल प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो रहे हैं। साथ ही विश्वविद्यालय की निर्णय प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर भी प्रश्नचिह्न लग गया है। दरअसल, सीनियरिटी सूची के आधार पर ही प्रोफेसरों को बोर्ड ऑफ स्टडीज का चेयरमैन और डीन जैसे महत्वपूर्ण पदों के लिए प्रस्तावित किया जाता है। साथ ही एक्सपर्ट पैनल में शामिल किया जाता है। ऐसे में मृत या सेवानिवृत्त शिक्षकों के नाम बने रहने से पूरी प्रक्रिया पर असर पड़ सकता है। सीनियरिटी सूची तैयार करने की जिम्मेदारी विकास शाखा की होती है। सूची बनाने के लिए झलकारी बाई कॉलेज के प्राचार्य डॉ. बीएल अहिरवार के नेतृत्व में नई कमेटी बनाई गई। इसमें प्रो. शांतिदेव सिसौदिया और प्रो. नवनीत गरुड़ शामिल थे। इन्होंने सूची को अंतिम रूप देने से पहले संबंधित कॉलेजों की जानकारी का ठीक से मिलान नहीं किया गया। इसी कारण मृत और सेवानिवृत्त प्रोफेसरों के नाम हटाए नहीं जा सके। नींद में जेयू प्रशासन… सूची में शामिल इन प्रोफेसरों का 5 व 7 साल पहले निधन सीधी बात – प्रो. राजकुमार आचार्य, कुलगुरु, जेयू कॉलेजों से अपडेट जानकारी नहीं मिली, इसलिए चूक
सीनियरिटी लिस्ट आखिरी बार कब अपडेट की गई?
– वर्ष 2026 की यह सूची नवंबर 2025 में जारी की गई थी। सूची में दिवंगत और रिटायर प्रोफेसरों के नाम कैसे रह गए?
– कॉलेजों ने समय पर अपडेटेड सूची नहीं भेजी, इसलिए यह दिक्कत हुई। इस गलत सूची के आधार पर कोई निर्णय, यह कब सुधरेगी?
– इस सूची के आधार पर कोई प्रशासनिक निर्णय नहीं लिया है। सभी कॉलेजों के प्राचार्यों से फिर से जानकारी मांगी है। जल्द सूची संशोधित करेंगे। ये जिम्मेदार… कुलसचिव के हस्ताक्षर से जारी हुई थी सूची
वरिष्ठता सूची तत्कालीन कुलसचिव डॉ. राकेश कुशवाह के हस्ताक्षर के बाद जारी हुई थी। शिक्षकों का कहना है जेयू प्रशासन को समय-समय पर समीक्षा कर सूची को अपडेट करना चाहिए था। विकास शाखा की अधीक्षक भारती बाथम से भी जवाब लिया जाना चाहिए।
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