बीते माह लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्वीटर (X) पर एक पोस्ट साझा करते हुए मध्य प्रदेश में मिड-डे मील की व्यवस्था पर सवाल उठाया था। साथ ही
श्योपुर जिले के एक सरकारी स्कूल के बच्चों का एक वीडियो साझा किया था, जिसमें वे पेपर पर मध्याह्न भोजन खा रहे थे। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री को शर्म आनी चाहिए कि वे देश के भविष्य को ऐसी दयनीय स्थिति में पाल रहे हैं।
लेकिन स्कूली शिक्षा और व्यवस्था पर सवाल उठाने वाली एक ऐसी ही खबर अब पन्ना से आई है। जहां शाहनगर विकासखंड के ग्राम झिरमीरा में कई बच्चों के पास आधार कार्ड न होने के कारण स्कूल में एडमिशन नहीं पा रहा है। शिक्षा के अधिकार के बावजूद ये बच्चे स्कूल तो जाते हैं, लेकिन पढ़ाई के लिए नहीं बल्कि बर्तन धोने व छोटे-मोटे काम करने के लिए। तस्वीर में आप देख सकते हैं किशोर को बर्तन धुलते हुए। उसके चारो तरफ स्कूल के अन्य छात्र खड़े हैं। वहीं, बीच में दुबका बैठा हुआ किशोर बर्तन धुलते दिख रहा है। ये तस्वीर व्यवस्था और सिस्टम से सवाल पूछ रही है?
बच्चों के भविष्य पर संकट
ग्राम झिरमीरा में बच्चों के भविष्य पर संकट खड़ा हो गया है। आधार कार्ड न होने के कारण स्कूल प्रबंधन उन्हें दाखिला देने से मना कर रहा है। पढ़ाई-लिखाई की उम्र में ये मासूम बच्चे स्कूल में बर्तन धोते नज़र आ रहे हैं।
‘2000 बच्चे ऐसे हैं जिनके पास आधार कार्ड नहीं’
अजय गुप्ता (DPC पन्ना) कहते हैं यह समस्या सिर्फ एक गांव तक सीमित नहीं है। पन्ना जिले में करीब 2000 बच्चे ऐसे हैं जिनके पास आधार कार्ड नहीं है, और इसी कारण वे शिक्षा की मुख्यधारा से दूर हो रहे हैं।
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वीडियो वायरल होने के बाद पन्ना जिले के मुख्य कार्यपालन अधिकारी उमराव सिंह मरावी ने मामले पर संज्ञान लिया है और तत्काल जांच के निर्देश दिए हैं। अधिकारियों को कहा गया है कि ऐसे सभी बच्चों की सूची तैयार कर जल्द से जल्द आधार बनवाया जाए और उन्हें स्कूलों में दाखिला दिलाया जाए।
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