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सारण के किसान इस वैरायटी को लगाकर तगड़ा फलन लेकर उसे बेचकर मोटी कमाई कर रहे हैं. उन्होंने बताया कि इसमें काफी ज्यादा मिठास है. यहां जैविक विधि से इसकी खेती कर रहे हैं. ऐसे में इसे खाने से किसी प्रकार का नुकसान नहीं होगा. बाहर से जो पपीता आ रहा है उसको रासायनिक खाद और केमिकल डालकर तैयार किया जाता है. यह शरीर के लिए काफी हानिकारक है.
विशाल कुमार/छपरा: बिहार के छपरा के किसान कृषि वैज्ञानिक से प्रशिक्षण लेकर हरी सब्जी के साथ-साथ फल फ्रूट की भी खेती कर रहे हैं. इससे वह अच्छी कमाई कर रहे हैं. जो फल पहले दूसरे राज्य से छपरा में बिक्री के लिए आता था अब वही फल-सब्जी सारण के किसान खुद उगा रहे हैं. इसे बेचकर किसानों को कमाई भी हो रही है. छपरा के कई किसान रेड लेडी ताइवान पपीता की खेती बड़े पैमाने पर कर रहे हैं. सारण की मिट्टी-पानी में यह पपीता बंपर फलन देता है. सबसे खास बात यह है कि यहां के लोग कृषि वैज्ञानिक से प्रशिक्षण लेकर जैविक विधि से इसकी खेती कर रहे हैं. इसको खाने से किसी प्रकार का नुकसान भी नहीं हो रहा है और पपीता का स्वाद भी काफी अच्छा मिल रहा है. इस पर किसानों को सब्सिडी भी मिल रही है. इस तरह से किसान कम लागत में अच्छी कमाई कर रहे हैं. इसकी खेती करने वाले छपरा के तरैया के किसान से हमने और अधिक जानकारी ली जो आप तक पहुंचा रहे हैं.
ताइवान रेड लेडी वैरायटी का पपीता जिले के तरैया प्रखंड के माधोपुर गांव निवासी राजीव प्रसाद लगाए हैं. उन्होंने बताया कि इसकी खेती का आइडिया उन्हें कृषि वैज्ञानिकों के द्वारा दी गई जानकारी से आया. किसानों को कृषि विभाग के लोग रेड लेडी तालिबानी पपीता के बारे में जानकारी दे रहे थे. उसके बाद उद्यान विभाग के द्वारा किसानों को प्रशिक्षण देकर सब्सिडी पर रेड लेडी ताइवानी पपीता का पौधा उपलब्ध कराया गया. किसानों को जैविक विधि से इसकी खेती करने के लिए बताया गया. इस आइडिया को अपनाकर किसान इस वैरायटी के पपीता से तगड़ा फलन ले रहे हैं.
कितने दिन में शुरू होता है फलन
ताइवानी पपीता लगाने के बाद 3 महीना के अंदर फलन शुरू हो जाता है. पौधे का ग्रोथ दो से ढाई फीट के हो जाने के बाद फलन शुरू हो जाता है. एक बार लगाने के बाद किसान एक ही पौधे से दो बार फलन ले सकते हैं. एक पौधा 80 से डेढ़ क्विंटल तक फलन देता है. एक पौधे पर 35 से 40 रुपये तक खर्च आता है. कमाई की बात करें तो एक पौधे से कम से कम 2,500 से 8,000 रुपये तक कमाई हो सकती है.
लोकल 18 से राजीव प्रसाद ने बताया कि रेड लेडी ताइवानी वैरायटी का पपीता उन्होंने लगाया है. एक पपीता का वजन दो से ढाई किलो का होता है. सारण के किसान इस वैरायटी को लगाकर तगड़ा फलन लेकर उसे बेचकर मोटी कमाई कर रहे हैं. उन्होंने बताया कि इस पपीते में काफी ज्यादा मिठास है. हम लोग जैविक विधि से इसकी खेती कर रहे हैं. इसे खाने से किसी प्रकार का नुकसान नहीं होगा. बाहर से जो पपीता आ रहा है उसको रासायनिक खाद और केमिकल डालकर तैयार किया जाता है. यह शरीर के लिए काफी हानिकारक है.
उन्होंने बताया कि हरी सब्जी के साथ-साथ अगर इस वैरायटी के पपीते के भी खेती करेंगे तो अच्छी कमाई होगी. उन्होंने बताया कि इसके पहले भी इस वैरायटी को लगाए थे और अच्छा फलन हुआ था. उद्दान विभाग से उन्हें सब्सिडी पर पौधा मिला है. लगभग 40 प्रतिशत इस पर अनुदान मिलता है.
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