अजमेर शरीफ दरगाह के गद्दीनशीन एवं चिश्ती फाउंडेशन के चेयरमैन हाजी सैयद सलमान चिश्ती ने अयातुल्ला अली खामेनेई की हत्या और मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव पर गहरा दुख और चिंता व्यक्त की है। रमजान के पवित्र महीने में जारी अपने आधिकारिक बयान में उन्होंने इसे न केवल राजनीतिक, बल्कि आध्यात्मिक रूप से भी अत्यंत गंभीर घटना बताया।
‘खामनेई की हत्या झकझोरने वाला कृत्य’
उन्होंने कहा कि अयातुल्ला अली खामेनेई केवल ईरान के सर्वोच्च नेता नहीं थे, बल्कि शिया मुस्लिम समुदाय के लिए एक सर्वोच्च धार्मिक मार्गदर्शक और आध्यात्मिक नेतृत्व के प्रतीक थे। उनका स्थान शिया इस्लाम में वैसा ही था, जैसा रोमन कैथोलिक चर्च में पोप का होता है। ऐसे महान धार्मिक व्यक्तित्व को निशाना बनाना पूरी दुनिया की धार्मिक भावनाओं को झकझोरने वाला कृत्य है।
‘खामनेई की हत्या अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून का उल्लंघन’
हाजी सैयद सलमान चिश्ती ने कहा कि 86 वर्षीय आध्यात्मिक नेता पर उनके आधिकारिक आवास में किया गया हमला अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून और वैश्विक नैतिक मूल्यों का गंभीर उल्लंघन है। यह घटना न केवल मध्य पूर्व को युद्ध की आग में झोंक सकती है, बल्कि वैश्विक शांति के लिए भी बड़ा खतरा बन सकती है। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर यह भी उल्लेख किया कि इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के खिलाफ अंतर्राष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय में कथित युद्ध अपराधों को लेकर कानूनी कार्यवाही और गिरफ्तारी वारंट से जुड़े मामले पहले से मौजूद हैं। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय समुदाय को इस बढ़ती हिंसा पर मौन नहीं रहना चाहिए।
‘राजनीतिक फैसलों को किसी भी धर्म से जोड़ना गलत’
सैयद सलमान चिश्ती ने स्पष्ट किया कि किसी भी राजनीतिक नेता को पूरे धर्म का प्रतिनिधि नहीं माना जा सकता। यहूदी धर्म, इस्लाम और ईसाई धर्म सभी न्याय, मानवता और जीवन की पवित्रता का संदेश देते हैं। राजनीतिक फैसलों को किसी भी धर्म से जोड़ना उचित नहीं है।
भारत सरकार से की अपील
उन्होंने भारत सरकार से अपील करते हुए कहा कि भारत और ईरान के बीच सदियों पुराने सांस्कृतिक और सूफी आध्यात्मिक संबंध रहे हैं। ऐसे में भारत को अंतरराष्ट्रीय मंचों पर शांति, संयम और युद्धविराम की मजबूत आवाज बनना चाहिए। साथ ही मध्य पूर्व में रह रहे भारतीय नागरिकों की सुरक्षा और उनकी संभावित निकासी की तैयारियों पर विशेष ध्यान दिया जाना चाहिए।
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बमबारी से शांति नहीं आती
अजमेर शरीफ दरगाह से संदेश देते हुए उन्होंने कहा, ‘हिंसा से वैधता नहीं मिलती, बमबारी से शांति नहीं आती और हत्या से स्थिरता नहीं बनती। इतिहास गवाह है कि अंधा सैन्यवाद केवल दुख और विनाश को बढ़ाता है।’अपने बयान के अंत में उन्होंने दुआ करते हुए कहा कि अल्लाह मासूमों की रक्षा करे, शोक संतप्त लोगों को सब्र दे और विश्व नेतृत्व को संयम व बुद्धिमत्ता की राह दिखाए, ताकि मानवता किसी बड़े युद्ध की ओर न बढ़े। उन्होंने कहा कि अजमेर शरीफ की धरती से अमन-चैन और विश्व शांति के लिए प्रार्थना की जा रही है।
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