यहां ठहरने वाले लोगों को कंबल, बेडशीट, मच्छरदानी जैसी सभी आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई जाती हैं, जो किसी होटल में मिलने वाली सुविधाओं से कम नहीं हैं. ठंड के इस मौसम में जब सरगुजा अंचल में तापमान लगातार गिर रहा है, ऐसे में गरीब और जरूरतमंद लोगों के लिए बस स्टैंड स्थित अंबिकापुर का यह रैन बसेरा सुरक्षित और बेहतर विकल्प बनकर उभरा है.
₹30–₹70 में मिलती हैं बुनियादी सुविधाएं
अंबिकापुर बस स्टैंड में केयरटेकर के रूप में कार्यरत रीतू एक्का ने लोकल 18 को बताया कि यहां रुकने वाले लोगों को कंबल, बेडशीट और मच्छरदानी जैसी आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई जाती हैं, जो 24 घंटे के लिए मान्य रहती हैं। सामान्य लोगों के लिए ठहरने का शुल्क ₹70 प्रतिदिन है, जबकि छत्तीसगढ़ के निवासियों के लिए यह मात्र ₹30 रखा गया है. वहीं, दिव्यांग (विकलांग) व्यक्तियों के लिए ₹30 या आवश्यकता पड़ने पर निशुल्क ठहरने की सुविधा भी दी जाती है।
आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को मिल रहा सहारा
रीतू एक्का ने बताया कि यहां अधिकतर वे लोग आते हैं, जो आर्थिक कठिनाइयों से जूझ रहे होते हैं और जिनके पास रहने की कोई पुख्ता व्यवस्था नहीं होती। यह स्थान उनके लिए सुरक्षित और सुलभ आश्रय का काम करता है। कई लोग यहां लंबे समय से रह रहे हैं और व्यवस्थाओं की खुले दिल से सराहना करते हैं।
भोजन व्यवस्था अस्थायी रूप से बंद, अन्य सुविधाएं चालू
रीतू ने बताया कि पहले यहां भोजन की भी सुविधा उपलब्ध थी, लेकिन वर्तमान में लोगों की संख्या कम होने के कारण भोजन व्यवस्था अस्थायी रूप से बंद है. हालांकि, आरओ फ़िल्टर वाला शुद्ध पेयजल, शौचालय, बिजली और स्नान की सुविधा 24 घंटे उपलब्ध है, जिससे लोगों को किसी तरह की परेशानी नहीं होती.
वाराणसी से आए अजय कुमार ने की व्यवस्था की सराहना जानिए..
यहां ठहरे अजय कुमार, जो पेशे से इलेक्ट्रिकल का काम करते हैं और वाराणसी के निवासी हैं, उन्होंने लोकल 18 से बातचीत में बताया कि वे पिछले 20–25 दिनों से यहां रह रहे हैं। उनके अनुसार, छत्तीसगढ़ सरकार की यह व्यवस्था बेहद सराहनीय है, क्योंकि यह सभी वर्गों के लोगों के लिए समान रूप से उपलब्ध है.
बिना दबाव के भुगतान, ठंड में मिली बड़ी राहत
अजय कुमार ने कहा कि ₹70 प्रतिदिन के बेहद कम शुल्क में इतनी अच्छी सुविधाएं मिलना खासकर ठंड के मौसम में बहुत बड़ी राहत है. सबसे खास बात यह है कि यहां किसी पर भुगतान का दबाव नहीं डाला जाता. अगर कोई व्यक्ति एक-दो दिन बाद भी भुगतान करता है, तो कोई आपत्ति नहीं होती.
उनके अनुसार, यह व्यवस्था न केवल सुविधाजनक है, बल्कि पूरी तरह से मानवीय और जरूरतमंदों के हित में है.
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