अस्पताल इलाज के लिए पहुंचे लोग मजबूरी में शुल्क देने को विवश हैं, जिससे उन्हें मानसिक और आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है.हैरानी की बात यह है कि यह पूरा खेल लंबे समय से चल रहा है, लेकिन अस्पताल प्रबंधन इससे अनजान बना हुआ है या फिर जानबूझकर आंखें मूंदे बैठा है. सवाल यह उठता है कि आखिर कब तक मेडिकल कॉलेज अस्पताल में साइकिल स्टैंड के नाम पर यह लूट जारी रहेगी और जिम्मेदारों पर कार्रवाई कब होगी.
मरीज सहित परिजन परेशान
संभाग के सबसे बड़े मेडिकल कॉलेज चिकित्सालय में इलाज के लिए पहुंचने वाले हजारों मरीज और उनके परिजन इन दिनों एक नई समस्या से जूझ रहे हैं. अस्पताल परिसर में प्रवेश करते ही दोपहिया और चारपहिया वाहन चालकों से साइकिल स्टैंड के नाम पर अवैध वसूली की जा रही है. आरोप है कि श्री साई स्वयं सहायता समूह द्वारा बिना क्रमांक, दिनांक और वाहन विवरण वाली फर्जी रसीदें थमाकर नियमों को ताक पर रखा जा रहा है, जिससे वाहन सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं.
मुख्य ओपीडी और मातृ-शिशु चिकित्सालय में रोजाना उमड़ती है भीड़
मेडिकल कॉलेज अस्पताल की मुख्य ओपीडी सहित विभिन्न विभागों और सड़क के दूसरी ओर स्थित मातृ-शिशु चिकित्सालय में प्रतिदिन बड़ी संख्या में मरीज पहुंचते हैं. सुबह से शाम तक अस्पताल परिसर में वाहनों की लंबी कतारें लगी रहती हैं. इसी भीड़ का फायदा उठाकर कथित रूप से साइकिल स्टैंड संचालक वाहन चालकों से मनमानी वसूली कर रहे हैं.
फर्जी रसीदों पर न क्रमांक, न दिनांक, न वाहन नंबर
वाहन स्टैंड की जो रसीदें दी जा रही हैं, उनमें न तो कोई क्रमांक अंकित है और न ही दिनांक, वाहन क्रमांक या अधिकृत हस्ताक्षर दर्ज हैं. ऐसे में स्टैंड संचालकों के पास यह तक जानकारी नहीं रहती कि कौन सा वाहन कब और किसका खड़ा किया गया है. इससे वाहन चोरी या क्षति की स्थिति में जिम्मेदारी तय करना लगभग असंभव हो जाता है.
शुल्क तय, लेकिन नियम ताक पर
जानकारी के अनुसार साइकिल से 5 रुपये, मोटरसाइकिल से 10 रुपये और चारपहिया वाहन से 20 रुपये शुल्क वसूला जा रहा है. हालांकि नागरिकों का कहना है कि शुल्क वसूली के बावजूद न तो वाहनों की उचित देखरेख की जा रही है और न ही कोई सुरक्षा व्यवस्था मौजूद है.
रसीद में ही लिख दिया जिम्मेदारी हमारी नहीं
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि श्री साई स्वयं सहायता समूह, भट्ठापारा के नाम से जारी पर्ची में साफ लिखा गया है कि रसीद गुम होने पर समूह जिम्मेदार नहीं होगा और पार्किंग स्थल के बाहर वाहन खड़ा करने पर स्टैंड की कोई जिम्मेदारी नहीं होगी. इससे यह स्पष्ट होता है कि शुल्क लेने के बावजूद समूह किसी भी प्रकार की जवाबदेही लेने को तैयार नहीं है.
अनुबंध की शर्तों से भी अनजान समूह की सदस्य
स्थानीय लोगों का आरोप है कि साइकिल स्टैंड संचालन से जुड़ी महिलाओं को स्वयं अनुबंध की शर्तों और नियमों की जानकारी तक नहीं है. नागरिकों का कहना है कि यह पूरा मामला योजनाबद्ध तरीके से वाहन स्टैंड के नाम पर लूट-खसोट का प्रतीत होता है.
अधीक्षक बोले जल्द लागू होगी नई व्यवस्था
इस पूरे मामले में अस्पताल अधीक्षक डॉ. आरसी आर्या ने बताया कि संबंधित महिला समूह पिछले तीन वर्षों से साइकिल स्टैंड का संचालन कर रहा है. उन्होंने कहा कि अब टेंडर प्रक्रिया के माध्यम से नई व्यवस्था लागू की जाएगी, ताकि मेडिकल कॉलेज अस्पताल में आने वाले मरीजों और उनके परिजनों को किसी भी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े.
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