मोबाइल ने बनाया आधुनिक किसान
सरगुजा निवासी सजन मिंज ने लोकल 18 से बातचीत में बताया कि उन्होंने साल 2025 में आधुनिक तरीके से खेती की शुरुआत की. पहले उन्होंने बैंगन की खेती को देखा, फिर मोबाइल से जानकारी लेकर खुद मेहनत करके फसल लगाई. बैंगन की फसल समाप्त होते ही उन्होंने गोभी की खेती शुरू कर दी. करीब 1700 पौधे लगाए गए हैं और दो महीनों में पौधे शानदार दिख रहे हैं. एक-दो जगह फूल आना शुरू हो चुका है और 15-20 दिनों में कटाई की स्थिति बनने की उम्मीद है.
परंपरागत ‘हड्डी’ लगाने की परंपरा
सजन मिंज बताते हैं कि उनके पूर्वज खेत में ‘हड्डी’ लगाते थे ताकि नजर न लगे. यह परंपरा आज भी जारी है. गोभी के साथ-साथ उन्होंने मूली, मटर, लौकी और सेमी जैसी सब्जियों की खेती भी शुरू कर दी है. दवाई, खाद और सिंचाई पर वे दिन-रात मेहनत कर रहे हैं.
खाद और तकनीक का पूरा इस्तेमाल
मिंज के अनुसार खेत में पोटाश, डीएपी, जिंक, यूरिया, सुपर, 13-40, 52-0-34, 50-50 और 19-19 सहित सभी आवश्यक खाद डाले गए हैं. सारी जानकारी वे मोबाइल और अनुभवी किसानों की सलाह से लेते हैं. पहले वे बारी में मकई बोते थे और उसके बाद सरसों लगाते थे, लेकिन अब 2025 में उन्होंने आधुनिक खेती की नई शुरुआत की है.
लागत और लाभ 5 हजार खर्च
सजन मिंज के मुताबिक, गोभी की खेती में कुल लगभग 5,000 रुपये की लागत आई है. अगर बाज़ार में गोभी का रेट 50 रुपये किलो मिलता है और 1700 पौधों से कम से कम एक पाव भी उत्पादन मिलता है, तो करीब 9 क्विंटल गोभी तैयार होगी, जिससे लगभग 50 हजार रुपये की आय होने की संभावना है. बैंगन की फसल में उन्होंने 90 हजार रुपये लगाए थे और 90 हजार से ढाई लाख रुपये तक की आमदनी हुई थी. गोभी को 2 सितंबर के आसपास लगाया गया था और 20 दिसंबर से इसकी बिक्री शुरू होने की उम्मीद है.
परिवार का योगदान
सजन मिंज ने बताया कि बड़ी बेटी रायपुर में नर्सिंग की पढ़ाई पूरी कर प्राइवेट ड्यूटी कर रही है. छोटा बेटा खेती सीख रहा है और 12वीं की पढ़ाई भी कर रहा है. वह खेत में दवाई, पानी और देखभाल में पिता का पूरा हाथ बंटाता है. परिवार में दो बेटे और एक बेटी हैं और तीनों मेहनती हैं. बेटे का कहना पढ़ाई भी, खेती भी जरूरी… सजन मिंज के छोटे बेटे ने बताया कि मैं पढ़ाई भी करता हूं और खेती भी. अभी गोभी लगी है, इसके बाद करेला और टमाटर लगाएंगे. पापा के साथ काम करना अच्छा लगता है. पढ़ाई के साथ खेती का अनुभव भी जरूरी है, तभी आगे खेती कर पाएंगे. पढ़ाई और खेती दोनों के लिए अलग-अलग समय निकालता हूं.
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