मामले की जानकारी मिलने पर डिप्टी कलेक्टर ने दिव्यांग परिवार से मुलाकात की और पूरे प्रकरण की जांच कर न्यायोचित कार्रवाई का आश्वासन दिया है.
70 सालों से जिस जमीन पर जीवन टिका
सीतापुर विधानसभा क्षेत्र के ग्राम बटईकेला स्थित खसरा नंबर 1784 की लगभग एक एकड़ शासकीय भूमि पर केवला बाई और उनके परिवार का पिछले करीब 70 वर्षों से कब्जा है. परिवार इसी जमीन पर खेती-बाड़ी कर जीवनयापन करता आ रहा है. वर्तमान में इस भूमि से परिवार के 12 सदस्यों की रोजी-रोटी जुड़ी हुई है.
परिवार के चार सदस्य दिव्यांग, फिर भी नहीं मिला संरक्षण
इस परिवार में 18 वर्षीय राहुल चौहान और 16 वर्षीय प्रिंशी चौहान दृष्टिहीन हैं. वहीं शांति चौहान (रामसाय की पत्नी) शारीरिक रूप से दिव्यांग हैं, जबकि फिरन सिंह मानसिक रूप से अस्वस्थ हैं. दिव्यांगता के बावजूद परिवार को किसी भी प्रकार का प्रशासनिक संरक्षण या पुनर्वास नहीं मिला.
बिना ग्रामसभा की अनुमति डाली गई आंगनबाड़ी की नींव
परिवार का आरोप है कि ग्राम पंचायत द्वारा बिना किसी पूर्व सूचना, चर्चा या ग्रामसभा की अनुमति के उनकी कृषि भूमि पर जबरन आंगनबाड़ी भवन की नींव डाल दी गई. इससे न सिर्फ खेती प्रभावित हुई, बल्कि परिवार का भविष्य भी अंधकार में चला गया.
प्रभावशाली परिवार पर कार्रवाई नहीं, सिर्फ दिव्यांगों को निशाना
पीड़ित परिवार का कहना है कि उसी शासकीय भूमि पर कब्जा किए बैठे एक गुप्ता परिवार के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की जा रही. आरोप है कि सरपंच और सचिव प्रभावशाली लोगों के इशारे पर सिर्फ दिव्यांग परिवार को बेदखल करने की कोशिश कर रहे हैं.
आंगनबाड़ी कार्यकर्ता की निजी सुविधा के लिए निर्माण का आरोप
परिवार ने यह भी आरोप लगाया है कि आंगनबाड़ी निर्माण का टेंडर लेने वाले ठेकेदार की पत्नी स्वयं आंगनबाड़ी कार्यकर्ता है और अपनी निजी सुविधा के लिए अपने घर के पास ही आंगनबाड़ी भवन का निर्माण कराना चाहती है.
जमीन गई तो भूखे मरने की नौबत
परिवार का कहना है कि यदि कृषि भूमि छीन ली गई तो उनके सामने भोजन तक का संकट खड़ा हो जाएगा. दिव्यांग सदस्यों के इलाज और पालन-पोषण की कोई वैकल्पिक व्यवस्था नहीं है. इसी मानसिक और सामाजिक प्रताड़ना से परेशान होकर परिवार ने राष्ट्रपति से इच्छा मृत्यु की मांग की है.
पीड़ित दिव्यांग परिवार कलेक्टोरेट पहुंचा और राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपा. डिप्टी कलेक्टर ने ग्रामीणों से मुलाकात कर निर्माण कार्य रुकवाने और पूरे मामले की जांच कराने का आश्वासन दिया.
डिप्टी कलेक्टर रामराज सिंह ने कहा“बटईकेला के कुछ ग्रामीणों ने राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपा है. उनका कहना है कि वे 70 वर्षों से शासकीय जमीन पर काबिज हैं और वहीं खेती कर रहे हैं. उक्त भूमि पर आंगनबाड़ी का निर्माण चल रहा है। फिलहाल काम रुकवाने की प्रक्रिया चल रही है और पूरे मामले की जांच कराई जाएगी.
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