अस्पतालों में धूल खा रही 58 सीबीसी मशीनें
प्रदेश के स्वास्थ्य केंद्रों में मरीजों की रक्त जांच के लिए सप्लाई की गई सीबीसी मशीनें महीनों से बंद पड़ी हैं. आधुनिक तकनीक वाली ये मशीनें कुछ ही मिनटों में रिपोर्ट देने में सक्षम हैं, लेकिन सप्लाईकर्ता कंपनी द्वारा लॉक कर दिए जाने के बाद ये बेकार हो गई हैं. करोड़ों की लागत से खरीदी गई ये मशीनें अस्पतालों में धूल फांक रही हैं और मरीज जांच सुविधा से वंचित हैं.
कंपनी-शासन विवाद बना बड़ी बाधा
सीबीसी मशीनों की सप्लाई करने वाली निजी कंपनी और शासन के बीच री-एजेंट सप्लाई को लेकर विवाद चल रहा है. इसी विवाद के बाद कंपनी के कर्मचारियों ने जिले से रवाना होते समय ज्यादातर मशीनों में अपना पासवर्ड डालकर उन्हें लॉक कर दिया. लॉक होने के बाद अस्पतालों में ब्लड जांच पूरी तरह बंद हो गई है, जिससे रोज आने वाले मरीजों को भारी परेशानी हो रही है.
मरीजों को निजी क्लिनिकों का सहारा
सरकारी अस्पतालों में जांच बंद होने से मरीज मजबूरन निजी पैथोलॉजी सेंटरों में जाकर महंगी जांचें करा रहे हैं. गरीब वर्ग के लोग सबसे अधिक प्रभावित हैं, जिन्हें मुफ्त सरकारी जांच की सुविधा नहीं मिल पा रही है. सिर्फ 53 मशीनें काम कर रही, 58 पूरी तरह ठप स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार…
कुल सप्लाई मशीनें …111
चालू मशीनें: 53
बंद/लॉक मशीनें: 58
जिला-वाइज स्थिति
सरगुजा
कुल मशीनें: 34
चालू: 17
बंद/लॉक: 17
सूरजपुर
कुल मशीनें: 47
चालू: 28
बंद/लॉक: 19
बलरामपुर
कुल मशीनें: 30
चालू: 8
बंद/लॉक: 22
इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि आधे से अधिक मशीनें बेकार पड़ी हैं.
अब तक नहीं हुई कोई ठोस कार्रवाई
मशीनों के लंबे समय से बंद पड़े होने की जानकारी जिला स्तर से लेकर प्रदेश स्तर तक के अधिकारियों को है। कभी लॉक खोलने की बात सामने आई, तो कभी नया टेंडर जारी करने की चर्चा हुई, लेकिन अब तक कोई निर्णय नहीं लिया गया है। अस्पतालों में मशीनें ज्यों की त्यों बंद रखी हुई हैं।
शासन को दी गई जानकारी जानिए
इस मामले में स्वास्थ्य विभाग के संभागीय संयुक्त संचालक डॉ. अनिल शुक्ला ने कहा कि शासन को इस समस्या से अवगत कराया गया है. मरीजों को बेहतर सुविधाएं दिलाने के प्रयास जारी हैं. जल्द ही इसके समाधान पर सकारात्मक निर्णय लिया जाएगा.
Discover more from India News
Subscribe to get the latest posts sent to your email.