जिले के खिलचीपुर-भोजपुर क्षेत्र के भूमरिया गांव में इन दिनों भावनाओं का सैलाब उमड़ा हुआ है। वर्ष 2004 में लापता हुए सुरेंद्र विश्वकर्मा 22 वर्षों बाद अपने घर लौट आए हैं। उनका परिवार, जिसने लगभग उम्मीद छोड़ दी थी, इस मिलन को किसी चमत्कार से कम नहीं मान रहा।
करीब दो दशक पहले जब सुरेंद्र घर से निकले थे, तब उनका बेटा महज दो साल का था। परिवार ने रिश्तेदारों और आसपास के जिलों में तलाश की तथा भोजपुर थाने में गुमशुदगी दर्ज कराई, लेकिन दो साल तक कोई सुराग नहीं मिला। समय के साथ परिवार ने हालात स्वीकार कर लिए, पर पत्नी और परिजनों के मन में उम्मीद बनी रही।
हाल ही में मामले में नया मोड़ तब आया, जब अमित तोलानी के अनुसार श्रीनगर पुलिस से सूचना मिली कि सुरेंद्र विश्वकर्मा नाम का व्यक्ति वहां मिला है, जिसकी गुमशुदगी मध्य प्रदेश में दर्ज है। जानकारी के मुताबिक वह लंबे समय से कश्मीर क्षेत्र में भटकते हुए जीवन बिता रहे थे और श्रीनगर के एक मानसिक चिकित्सालय में उनका उपचार चल रहा था।
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पहचान की पुष्टि के लिए वीडियो कॉल के जरिए दोनों पक्षों की बातचीत कराई गई। वर्षों बाद आमने-सामने आए चेहरों को देखकर परिवार भावुक हो उठा। पुष्टि होने के बाद पुलिस के समन्वय से सुरेंद्र को सुरक्षित राजगढ़ लाया गया।
गांव पहुंचने पर भूमरिया में उत्सव जैसा माहौल बन गया। 24 वर्षीय बेटा, जो बचपन में पिता से बिछड़ा था, अब स्वयं पिता बन चुका है। दो साल की पोती ने अपने दादा का स्वागत किया। पत्नी की आंखों से खुशी के आंसू थम नहीं रहे थे। इस घटनाक्रम में श्रीनगर और राजगढ़ पुलिस के तालमेल की सराहना की जा रही है, जिसने दो दशक बाद बिछड़े परिवार को फिर से मिलाने में अहम भूमिका निभाई।
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