Agriculture News: नीलगाय से फसल बचाने के लिए लखन कुमार चौधरी ने एक सरल लेकिन प्रभावी उपाय अपनाया है. वे गेहूं के खेत की मेढ़ पर सूर्यमुखी की फसल लगाते हैं. सूर्यमुखी के पौधों से निकलने वाली गंध नीलगाय को पसंद नहीं होती है.
नीलगाय से होने वाला भारी नुकसान
इस इलाके में किसानों के लिए नीलगाय एक बड़ी चुनौती हैं. नीलगाय झुंड में खेतों में घुसकर खड़ी फसलों को रौंद देती हैं और भारी नुकसान पहुंचाती हैं. गेहूं, अरहर और अन्य फसलें इनके निशाने पर रहती हैं. कई बार रातों-रात किसानों की मेहनत पर पानी फिर जाता है. लखन कुमार चौधरी बताते हैं कि पहले भी उनकी फसलें नीलगाय के कारण बर्बाद हो चुकी थीं, जिससे आर्थिक क्षति उठानी पड़ी थी. आसपास के किसान आज भी इस समस्या से जूझ रहे हैं.
किसान ने अपनाया देसी और कारगर उपाय
नीलगाय से फसल बचाने के लिए लखन कुमार चौधरी ने एक सरल लेकिन प्रभावी उपाय अपनाया है. वे गेहूं के खेत की मेढ़ पर सूर्यमुखी की फसल लगाते हैं. सूर्यमुखी के पौधों से निकलने वाली गंध नीलगाय को पसंद नहीं होती है. पिछले साल उन्होंने पहली बार इस तकनीक को अपनाया था. परिणाम चौंकाने वाले रहे है.जहां आसपास के खेतों में नीलगाय ने काफी नुकसान किया, वहीं उनके खेत पूरी तरह सुरक्षित रहे. इस साल भी उन्होंने गेहूं की मेढ़ पर सूर्यमुखी लगाए हैं, ताकि फसल सुरक्षित रहे.
तकनीक से मिले फायदे
लखन कुमार चौधरी का कहना है कि सूर्यमुखी की मेढ़बंदी से नीलगाय खेत के आसपास भी नहीं भटकतीं. इससे फसल को बिना किसी अतिरिक्त खर्च के सुरक्षा मिल जाती है. न तो महंगी बाड़ लगाने की जरूरत पड़ती है और न ही रात-दिन रखवाली करनी होती है. इसके अलावा सूर्यमुखी की फसल से अतिरिक्त आय की संभावना भी रहती है. यह तकनीक पर्यावरण के अनुकूल है और अन्य किसानों के लिए भी प्रेरणा बन सकती है. लखन कुमार चौधरी की यह पहल साबित करती है कि थोड़ी समझदारी और अनुभव से खेती की बड़ी समस्याओं का समाधान निकाला जा सकता है.
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