सुरक्षाबल माओवादियों के खिलाफ तेजी से अभियान चला रहे हैं. अब इसी कड़ी में जवानों द्वारा माओवादियों के स्मारकों पर बुलडोजर चलाया गया है. लगातार जारी अभियान को माओवादी प्रचार-प्रसार और मनोवैज्ञानिक प्रभाव समाप्त करने की दिशा में अहम माना जा रहा है.
सुकमा जिले में यह कार्रवाई केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) की 50वीं बटालियन के जवानों द्वारा कमांडेंट प्रेमजीत कुमार के निर्देश पर की गई. बताया जा रहा है कि यह स्मारक दक्षिण बस्तर क्षेत्र का सबसे विशालकाय नक्सली स्मारक था, जिसे संगठन अपनी ताकत और प्रभाव के प्रतीक के रूप में पेश करता रहा है. गौरतलब है कि बीते 3 जनवरी को इसी इलाके में सुरक्षाबलों की कार्रवाई में 12 नक्सली मारे गए थे. इसके बाद से क्षेत्र में सुरक्षा बलों की लगातार दबिश जारी है.
नक्सली स्मारक संगठन की विचारधारा और दबदबे को कायम रखने का माध्यम होते हैं. ऐसे प्रतीकों को ध्वस्त कर सुरक्षाबल न सिर्फ भौतिक ढांचे को मिटा रहे हैं, बल्कि नक्सलियों के मनोवैज्ञानिक प्रभाव को भी तोड़ने का प्रयास कर रहे हैं. दक्षिण बस्तर में नक्सल उन्मूलन अभियान लगातार तेज होता जा रहा है और सुरक्षा बलों की सख्त कार्रवाई से संगठन पर दबाव बढ़ता जा रहा है.
ग्रामीणों के स्मारक को किया गया ध्वस्त
इस स्मारक को ध्वस्त करते वक्त आसपास के ग्रामीण मौजूद थे. ग्रामीणों ने कभी माओवादियों के साम्राज्य को बनता देखा होगा, उनके पहचान और साक्ष्य के रूप में स्थापित स्मारक को बनते देखा होगा. आज उनके सामने ही स्मारक ध्वस्त किया गया. यहां सिर्फ माओवाद संगठन को खत्म नहीं किया जा रहा बल्कि उनके हर उस दहशत भरे निशानों को खत्म किया जा रहा है. ताकि आने वाले समय में फिर से कोई देश विरोधी ताकत खड़ी ना हो पाए.
इसके अलावा बीजापुर में भी माओवादियों के खिलाफ सुरक्षाबलों का बुलडोजर एक्शन जारी है. 24 घंटे में बीजापुर जिले में अब तक 11 स्मारक जवानों ने ध्वस्त किए हैं. आज फिर अलग अलग थाना क्षेत्र में बुलडोजर कार्रवाई करते हुए पांच स्मारकों को जवानों ने जमींदोज किया है. तर्रेम के मंडीमरका जंगल में एक, जबकि थाना उसूर क्षेत्र के मारूड़बाका, पाउरगुड़ा एवं सिंगनपल्ली जंगलों में चार माओवादी स्मारक ध्वस्त किए गए हैं.
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