Last Updated:
फरीदाबाद के दयालपुर गांव में 306 देसी गेहूं की चर्चा जोरों पर है. लोकल 18 से बात करते हुए किसान दीपक बताते हैं कि इसका शुगर लेवल कम है इसलिए डायबिटीज मरीज इसे खासतौर पर खरीदते हैं. पैदावार भले थोड़ी कम हो, लेकिन स्वाद और क्वालिटी में यह आगे है. नवंबर में बुवाई और अप्रैल में कटाई होने वाली इस फसल की गांव में बढ़ती मांग देखी जा रही है. दीपक ने इसके बीज 6000 रुपये क्विंटल के हिसाब से खरीदे थे. एक एकड़ में करीब 50 किलो बीज लगता है.
उगाने का तरीका
Local 18 से बात करते हुए दीपक कहते हैं कि इस बार उन्होंने 306 वैरायटी बोई है, जो देसी किस्म है. पहले खेत की अच्छी तरह जुताई करवाई, फिर मशीन से बुवाई की. वैसे तो खेत ऑर्गेनिक तरीके से तैयार किया था, लेकिन इस बार खरपतवार ज्यादा हो गए तो मजबूरी में खरपतवार नाशक डालना पड़ा. एक बार पोटाश की खाद भी डाली ताकि फसल को पोषण मिल सके. दीपक कहते हैं कि इस किस्म की पैदावार बाकी किस्मों से थोड़ी कम रहती हैं लेकिन क्वालिटी में ये सब पर भारी है.
दीपक ने इसके बीज करीब 6000 रुपये क्विंटल के हिसाब से खरीदे थे. एक एकड़ में करीब 50 किलो बीज लगता है. ऐसे में एक एकड़ की लागत करीब 10 हजार रुपये तक पहुंच जाती है. पहले तो बाजार में इस गेहूं का भाव 3200 रुपये क्विंटल तक मिल जाता था. लेकिन दीपक का कहना है बाजार में कई बार लोग दूसरी किस्म को शरबती या एमपी शरबती बोलकर बेच देते हैं जबकि असली 306 वैरायटी इतनी सस्ती नहीं मिलती. कई बार 1147 जैसी हाइब्रिड किस्म को भी शरबती बताकर बेच देते हैं, जबकि वो असली 306 नहीं है.
डर केवल एक
इस गेहूं की एक और खास बात है कि इसका पौधा लंबा होता है. तेज हवा या आंधी आ गई तो गिरने का खतरा रहता है और यही सबसे बड़ा डर भी है. अगर मौसम साथ दे तो फसल शानदार मिलती है वरना नुकसान हो सकता है. दीपक बताते हैं कि बुवाई नवंबर में होती है और कटाई अप्रैल में. इस बार उन्हें उम्मीद है कि फसल ठीक निकलेगी. गांव के लोग भी इस गेहूं को लेकर काफी उत्साहित हैं. जो लोग सेहत को लेकर सजग हैं वो खासतौर पर इस गेहूं की मांग कर रहे हैं. दयालपुर का ये देसी गेहूं अब धीरे-धीरे अपनी अलग पहचान बना रहा है.
About the Author
Priyanshu has more than 10 years of experience in journalism. Before News 18 (Network 18 Group), he had worked with Rajsthan Patrika and Amar Ujala. He has Studied Journalism from Indian Institute of Mass Commu…और पढ़ें
Discover more from India News
Subscribe to get the latest posts sent to your email.