जमुई जिले के खैरा प्रखंड क्षेत्र के नवडीहा के रहने वाले कुमोद साह की कहानी काफी हैरान कर देने वाली है. कुमोद कभी तीन भाई हुआ करते थे. पहले उन्होंने धान का कारोबार शुरू किया, तभी गलत मामले में फंसकर उन्हें जेल जाना पड़ा.
यह कहानी है जमुई जिले के खैरा प्रखंड क्षेत्र के नवडीहा गांव के रहने वाले किसान कुमोद कुमार की, जो अभी सेम की खेती कर रहे हैं. कुमुद ने करीब 20 एकड़ से भी अधिक में सेम और अन्य सब्जी की खेती की है. उन्होंने लीज पर जमीन लेकर सेम की खेती की है और उससे अच्छी कमाई कर रहे हैं. कुमोद साह ने इससे पिछले सीजन में टमाटर और बैंगन की खेती की थी, जिससे उन्होंने करीब तीस लाख से भी अधिक का मुनाफा हुआ था. कुमोद बताते हैं कि उनकी यह सफर काफी मुश्किलों से भरा रहा. जब मैंने अपने बिजनेस की शुरुआत की तो लगातार परेशानियां आती रही. परिवार के ऊपर संकट आता रहा और ऐसा लगा कि हमारा जीवन ऐसे ही मुश्किलों में बीत जाएगा.
कभी नहीं मानी हार, अब जाकर मिली है सफलता
कुमोद ने बताया कि उन्होंने मुंबई में ऑटो चलाने से अपने जीवन की शुरुआत की थी. इसके बाद उन्होंने कई तरह के बिजनेस किए, आखिर में उन्हें खेती में जाकर सफलता मिली. सेम की फसल अगस्त महीने में लगाई थी और 6 अक्टूबर से पहली फसल टूटने लगी. प्रतिदिन पांच क्विंटल सेम की फसल तोड़ते हैं और बाजार में बेच देते हैं. पिछले तीन महीनों में उन्होंने अब तक पंद्रह लाख से भी अधिक की केवल सेम बेची है. कुमोद ने बताया कि जब जीवन में परेशानियां आई तो एक समय ऐसा भी आया कि लगा के सब छोड़ दूं. लेकिन मुझे फिर से खड़ा होना था. मेरे पास एक धुर जमीन भी नहीं है, पर मैं अभी बीस एकड़ में सब्जी की खेती कर रहा हूं.
अभी काम करते हैं पचास से ज्यादा लोग
कुमोद बताते हैं कि मुझे कभी भी किसी के अंदर काम नहीं करना था. इसी कारण मैंने अपना पहला काम छोड़ दिया था. इसके बाद मैंने कई अलग-अलग व्यापार किए. आज मेरे यहां पचास से अधिक लोग काम करते हैं. अगले साल तक मैं अपने खेती को और बढ़ाऊंगा और ये साल खत्म होने तक मैं चालीस एकड़ में सब्जी की खेती करूंगा. कुमोद ने कहा कि मेरे जीवन का मंत्र यही था कि कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती, और मैंने भी कभी हार नहीं मानी. आज कुमोद आसपास के किसानों के लिए प्रेरणा बने हुए हैं. कुमोद बताते हैं कि सेम की खेती एटीएम की तरह है, जो आपको रोज पैसे देगा. लेकिन उसके बावजूद भी पूरे इलाके में कहीं भी इसकी खेती नहीं होती थी. मैंने कुछ अलग करने की ठानी और आज सेम की खेती कर रहा हूं.
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