Success story : महासमुंद जिले के हरदा नवागांव निवासी तालेश्वर ने यूट्यूब से फास्ट फूड बनाना सीखकर गांव में ही 5 हजार रुपये से दुकान शुरू की. तीन साल में उनकी दुकान लोकप्रिय हो गई है. मंचूरियन, चाउमीन और एग रोल बेचकर वे रोजाना करीब 2500 रुपये से अधिक की आमदनी कर रहे हैं और ग्रामीण युवाओं को आत्मनिर्भर बनने की प्रेरणा दे रहे हैं.
गांव में ही कुछ नया करने के लिए प्रेरित
तालेश्वर ने बताया कि वे हरदा नवागांव गांव के निवासी हैं और 12वीं की पढ़ाई पूरी करने के बाद आगे की राह को लेकर असमंजस में थे. गर्मियों की छुट्टियों के दौरान यूट्यूब पर फास्ट फूड बनाने और स्टार्टअप से जुड़े वीडियो देखने का उन्हें अवसर मिला. इन वीडियो में कम लागत में दुकान शुरू करने की जानकारी, सामग्री की तैयारी और ग्राहकों को आकर्षित करने के तरीके बताए गए थे. यूट्यूब से मिली इसी जानकारी ने तालेश्वर को गांव में ही कुछ नया करने के लिए प्रेरित किया.
उन्होंने इस बारे में अपने परिवार से चर्चा की, जहां उन्हें पूरा सहयोग मिला. इसके बाद तालेश्वर ने अपने भाई गौतम के साथ मिलकर फास्ट फूड की छोटी सी दुकान खोल दी. शुरुआत में लोगों को नए स्वाद को अपनाने में समय लगा, लेकिन धीरे-धीरे मंचूरियन, एग रोल, चाउमीन, एग चाउमीन और आमलेट जैसे फास्ट फूड की मांग बढ़ने लगी. स्वाद और साफ-सफाई की वजह से उनकी दुकान गांव और आसपास के क्षेत्रों में लोकप्रिय हो गई.
कम कीमत और अच्छा स्वाद उनकी दुकान की पहचान
तालेश्वर और गौतम दोनों भाई खुद ही फास्ट फूड तैयार करते हैं. ग्राहकों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए उन्होंने कीमत भी कम रखी है. मंचूरियन 40 रुपये में फुल प्लेट, चाउमीन 40 रुपये में फुल प्लेट और डबल अंडे का रोल 35 रुपये में उपलब्ध कराया जा रहा है. कम कीमत और अच्छा स्वाद उनकी दुकान की पहचान बन चुकी है.
तालेश्वर बताते हैं कि वर्तमान में इस छोटी सी दुकान से रोजाना लगभग 2500 रुपये से अधिक की आमदनी हो जाती है. महीने की आय 60 से 70 हजार रुपये तक पहुंच रही है, जिससे परिवार का खर्च चलने के साथ भविष्य के लिए बचत भी संभव हो पा रही है. वे मानते हैं कि यूट्यूब से मिली जानकारी ने उनके जीवन की दिशा बदल दी.
तालेश्वर की कहानी यह साबित करती है कि स्वरोजगार के लिए शहर जाना जरूरी नहीं है. अगर सही मार्गदर्शन और सीखने की इच्छा हो, तो गांव में रहकर भी यूट्यूब जैसे डिजिटल माध्यम से व्यवसाय शुरू कर आत्मनिर्भर बना जा सकता है. उनकी सफलता आज कई ग्रामीण युवाओं को प्रेरित कर रही है कि वे मोबाइल और इंटरनेट का उपयोग केवल मनोरंजन के लिए नहीं, बल्कि कमाई और विकास के साधन के रूप में करें.
About the Author
7 वर्षों से पत्रकारिता में अग्रसर. इलाहबाद विश्वविद्यालय से मास्टर्स इन जर्नालिस्म की पढ़ाई. अमर उजाला, दैनिक जागरण और सहारा समय संस्थान में बतौर रिपोर्टर, उपसंपादक औऱ ब्यूरो चीफ दायित्व का अनुभव. खेल, कला-साह…और पढ़ें
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