कश्मीर का ताज कहे जाने वाले गुलमर्ग में खेलो इंडिया विंटर गेम्स का 6वां संस्करण जारी है। राष्ट्रीय स्तर के इन शीतकालीन खेलों में भाग लेने वाले खिलाड़ियों और अधिकारियों के साथ गुलमर्ग में घूमने आ रहे आगंतुकों की सुरक्षा की जिम्मेदारी पहली बार जम्मू-कश्मीर पुलिस के विशेष स्नो लेपर्ड स्क्वॉड को दी गई है। यह विशेष यूनिट करीब 14000 फीट की ऊंचाई पर बर्फीली चोटियों पर तैनात है।
इन विशिष्ट जवानों को मुख्य रूप से पुलिस के स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (एसओजी) से चुना गया है। इन्हें कश्मीर तथा देश के अन्य हिस्सों में छह महीने से अधिक समय तक पैरा कमांडोज और ग्रे हाउंड्स के साथ गहन प्रशिक्षण दिया गया। इस एलीट यूनिट को खास तौर पर पहाड़ों में आतंकवाद के मुकाबले के लिए प्रशिक्षित किया गया है। इन्हें घने जंगलों, बर्फ से ढके पहाड़ी क्षेत्रों के साथ हाई एल्टीट्यूड वॉरफेयर के लिए तैयार किया गया है। ये जंगलों, ऊंचाई वाले इलाकों और कठिन परिस्थितियों लाले क्षेत्रों में आतंकियों को खोजकर मार गिराने में महारत रखते हैं।
जम्मू-कश्मीर पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने अमर उजाला के साथ बातचीत में कहा कि जिस तरह से आतंक के खिलाफ ऑपरेशन के लिए एसओजी/कार्गो है, उसी तरह ये भी जम्मू-कश्मीर पुलिस की एक विशेष यूनिट है। इसे स्नो लेपर्ड यूनिट का नाम दिया गया है। इस यूनिट के जवानों को सेना के पैरा कमांडोज और ग्रे हाउंड स्पेशल फोर्सेज के साथ ट्रेनिंग दी गई है। ये जम्मू कश्मीर पुलिस का स्पेशलाइज विंग है।
रक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि पहली बार पुलिस ने आतंकवादियों का मुकाबला करने के लिए खास हाई-एल्टीट्यूड कॉम्बैट यूनिट बनाई है। नई बनी यूनिट को जम्मू और कश्मीर दोनों संभागों के ऊंचे इलाकों और बर्फीले जंगलों में छिपे आतंकवादियों को खत्म करने का काम सौंपा गया है। इस पहल का मकसद इलाके के ऊबड़-खाबड़ पहाड़ों और जंगल वाले इलाकों को आतंक-मुक्त बनाना है। अधिकारियों का कहना है कि जम्मू-कश्मीर में स्थायी शांति और सुरक्षा सुनिश्चित करना ही आखिरी मकसद है।
कश्मीर में कहीं भी हो सकती है तैनाती
पुलिस अधिकारी ने बताया कि स्नो लेपर्ड की तैनाती कश्मीर में कहीं भी हो सकती है। हाई-एल्टीट्यूड पर आतंक के खिलाफ ऑपरेशन में इस्तेमाल किया जा सकता है। फिलहाल पहली बार ये गुलमर्ग खेलो इंडिया विंटर गेम्स में सुरक्षा के लिए लगाए गए हैं। कश्मीर में सौ से अधिक ऐसे जवान हैं जिन्हें प्रदेश और प्रदेश से बाहर करीब छह महीने से अधिक की विशेष ट्रेनिंग दी जा चुकी है। ये पिछले कुछ महीने से घाटी में तैनात हैं।
ऐसी मिली है ट्रेनिंग
स्नो लेपर्ड स्क्वॉड को बहुत खराब मौसम और मुश्किल इलाकों में काम करने की ट्रेनिंग दी गई है। माइनस 20 डिग्री सेल्सियस तापमान और कम ऑक्सीजन वाले व हिमस्खलन वाले क्षेत्र में इन्हें प्रशिक्षण मिला है। काउंटर-टेरर (सीटी) ऑपरेशन के अलावा इसके जवानों को डिजास्टर रिस्पॉन्स में खास ट्रेनिंग मिली है। इसमें एवलांच, लैंडस्लाइड और पहाड़ी इलाकों में आपदाओं से निपटना शामिल है।
आतंकियों के बदले षड्यंत्र के बीच हुआ गठन
स्नो लेपर्ड स्क्वॉड का गठन आतंकवादी समूहों के बदले षड्यंत्र के बीच हुआ है। इसके तहत आतंकी सुरक्षाबलों से बचने के लिए तेजी से शहरी इलाकों को छोड़कर घने जंगलों और ऊपरी इलाकों में पनाह ले रहे हैं। आंकड़ों के अनुसार जम्मू-कश्मीर के जंगली क्षेत्रों में लगभग 100 से 150 आतंकवादी छिपे हैं। इनमें से लगभग 95 प्रतिशत पाकिस्तान ट्रेंड हैं। पहलगाम हमले समेत किश्तवाड़ में हुई कुछ हालिया आतंकवादी घटनाओं में ये सामने आया है। यह स्क्वाड ऐसे आतंकियों का खात्मा करने में सक्षम है।
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