प्रथम पुरस्कार जीतने के बाद यूनिवर्सिटी पहुंची पीएचडी शोधार्थी श्रेया चहल। इस दौरान ब्लेजर में साथ खड़े वीसी सम्मान करते हुए
सोनीपत के दीनबंधु छोटू राम यूनिवर्सिटी की स्टूडेंट ने अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिक मंच पर हरियाणा का परचम लहराया है। लाला लाजपत राय पशु चिकित्सा एवं पशु विज्ञान विश्वविद्यालय, हिसार में आयोजित प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में डीसीआरयूएसटी, मुरथल की पी
मशरूम अर्क से ब्लूटंग वायरस के विरुद्ध एंटीवायरल सक्रियता की खोज पर आधारित उनकी प्रस्तुति थी और उनकी यह रिसर्च न सिर्फ वैज्ञानिक समुदाय को प्रभावित कर गई, बल्कि भारतीय युवा रिसर्चकर्ता के लिए प्रेरणा का नया अध्याय भी लिख गई। यूनिवर्सिटी के वीसी का कहना है कि उनकी उपलब्धि न केवल यूनिवर्सिटी की अकादमिक प्रतिष्ठा को मजबूती देती है, बल्कि बायोटेक्नोलॉजी क्षेत्र की भविष्य संभावनाओं को भी नई दिशा प्रदान करती है।
, मुरथल की पीएचडी शोधार्थी श्रेया चहल ने अपने इनोवेटिव रिसर्च कार्य के दम पर प्रथम पुरस्कार हासिल किया। सोनीपत में यूनिवर्सिटी पहुंचने पर वीसी ने उन्हें बधाई दी।
सम्मेलन की भव्यता और वैज्ञानिक समागम
सोसाइटी फॉर वेटरनरी साइंस एंड बायोटेक्नोलॉजी (SVSBT) 2025 द्वारा 3 से 5 दिसंबर तक एलयूवीएएस, हिसार में अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का भव्य आयोजन किया गया। “ब्रिजिंग साइंस एंड सोसायटी: बायोटेक्नोलॉजी फॉर सस्टेनेबल वन हेल्थ” थीम पर आधारित इस सम्मेलन में देश-विदेश के 200 से अधिक प्रतिनिधियों ने भाग लिया। कुल 240 वैज्ञानिक प्रस्तुतियां होने से सम्मेलन ज्ञान, शोध और नवाचार का बड़ा मंच साबित हुआ।
श्रेया चहल की चमकती उपलब्धि
दीनबंधु छोटूराम विज्ञान और प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (DCRUST), मुरथल की पीएचडी शोधार्थी श्रेया चहल ने डॉ. अनिल सिंधु के निर्देशन में किए जा रहे अपने रिसर्च कार्य पर मौखिक प्रस्तुति दी। उनका विषय “ब्लूटंग वायरस के विरुद्ध मशरूम अर्क की एंटीवायरल सक्रियता की जांच” रहा है।वैज्ञानिक समुदाय के लिए मॉडर्न और उपयोगी शोध के रूप में सामने आया। श्रेया की प्रस्तुति में वैज्ञानिक गहराई, डेटा विश्लेषण और रिसर्च का सामाजिक महत्व स्पष्ट झलका, जिसके आधार पर उन्हें सम्मेलन में प्रथम पुरस्कार से नवाजा गया।
सम्मान समारोह का विशेष क्षण
5 दिसंबर को आयोजित समापन समारोह में अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिकों और एक्सपर्ट की उपस्थिति में श्रेया चहल को यह सम्मान प्रदान किया गया। मंच पर युवा भारतीय शोधार्थी का नाम गूंजने पर उपस्थित वैज्ञानिकों ने उनके रिसर्च कार्य की सराहना की। यह क्षण विश्वविद्यालय और उसके बायोटेक्नोलॉजी विभाग के लिए गर्व का विषय रहा।

5 दिसंबर को आयोजित समापन समारोह में अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिकों और एक्सपर्ट की उपस्थिति में श्रेया चहल को यह सम्मान प्रदान किया गया और आज यूनिवर्सिटी पहुंचने पर बधाई दी
वीसी ने की सराहना, दिए महत्वपूर्ण घोषणाएं
श्रेया की उपलब्धि पर डीसीआरयूएसटी के वीसी प्रोफेसर श्रीप्रकाश सिंह ने हार्दिक बधाई देते हुए कहा कि यह सम्मान विश्वविद्यालय की वैज्ञानिक प्रतिष्ठा को नई ऊंचाइयों तक ले जा रहा है। उन्होंने घोषणा की कि बायोटेक्नोलॉजी विभाग की प्रयोगशालाओं को मॉडर्न उपकरणों और नई रिसर्च सुविधाओं से मजबूत किया जाएगा, ताकि शोधार्थियों को बेहतर माहौल मिल सके और ऐसे ही नवाचार पूर्ण रिसर्च को गति मिले। कुलपति ने कहा कि मशरूम आधारित बायोएक्टिव यौगिकों पर आधारित यह रिसर्च भविष्य में एंटीवायरल दवाओं के विकास में अहम भूमिका निभा सकता है।
यूनिवर्सिटी और प्रदेश का बढ़ा गौरव
यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय मंच पर श्रेया चहल की इस उपलब्धि ने न केवल डीसीआरयूएसटी, मुरथल बल्कि पूरे हरियाणा के रिसर्च समुदाय का गौरव बढ़ाया है। इससे युवा वैज्ञानिकों को वैश्विक स्तर पर शोध करने, नवाचार खोजने और समाज को वैज्ञानिक समाधान देने की प्रेरणा मिलती है। श्रेया की सफलता यह संदेश देती है कि जब शोधार्थी को उचित दिशा, मार्गदर्शन और संसाधन मिलते हैं, तो वे विज्ञान को नई ऊंचाइयों तक ले जा सकते हैं।
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