पाकुड़ जिला मुख्यालय स्थित संयुक्त कृषि भवन में संचालित मिट्टी जांच प्रयोगशाला किसानों के लिए बेहद लाभकारी साबित हो रही है। यह प्रयोगशाला किसानों को उनके खेतों की मिट्टी की मुफ्त जांच की सुविधा उपलब्ध करा रही है।
मिट्टी जांच के माध्यम से किसानों को यह जानकारी मिल रही है कि उनकी जमीन में किन पोषक तत्वों की कमी या अधिकता है और किस प्रकार की खाद व उर्वरक का प्रयोग करना चाहिए। इससे किसान अनावश्यक खर्च से बच रहे हैं और वैज्ञानिक तरीके से खेती कर पा रहे हैं।
12 मापदंडों पर होती है मिट्टी की जांच
कृषि विभाग के अनुसार, इस प्रयोगशाला में मिट्टी की जांच कुल 12 विभिन्न मापदंडों पर की जाती है। इनमें नाइट्रोजन, फास्फोरस और पोटेशियम (एनपीके) प्रमुख हैं। जांच रिपोर्ट के आधार पर किसानों को फसल चयन और उर्वरक उपयोग को लेकर विस्तृत सलाह दी जाती है।
विभाग का कहना है कि मृदा जांच से न केवल किसानों की उत्पादन लागत कम हो रही है, बल्कि फसलों की उत्पादकता में भी बढ़ोतरी हो रही है। इसका सीधा असर किसानों की आय पर पड़ रहा है और वे पहले की तुलना में अधिक लाभ कमा पा रहे हैं।
हजारों किसानों को मिल चुका है मृदा स्वास्थ्य कार्ड
मिट्टी जांच प्रयोगशाला के आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2024-25 में कुल 2,754 किसानों के खेतों से लिए गए मिट्टी के नमूनों की जांच की गई और उन्हें मृदा स्वास्थ्य कार्ड वितरित किए गए। वहीं वर्ष 2025-26 के लिए 3,925 नमूनों की जांच का लक्ष्य रखा गया है। अब तक 3,329 नमूने एकत्र किए जा चुके हैं, जिनमें से 1,522 नमूनों की जांच पूरी कर ली गई है। शेष नमूनों की जांच मृदा परीक्षण विशेषज्ञ प्रभाकर कुमार द्वारा फरवरी माह के अंत तक पूरी कर ली जाएगी।
केंद्र सरकार की योजना के तहत संचालित हो रहा केंद्र
जिला कृषि पदाधिकारी मृत्युंजय कुमार ने बताया कि यह प्रयोगशाला केंद्र सरकार की ‘मृदा स्वास्थ्य एवं उर्वरता योजना’ के तहत संचालित की जा रही है। उन्होंने कहा कि कृषक मित्र खेतों से जियो-टैगिंग के साथ मिट्टी के नमूने एकत्र करते हैं।
जांच के बाद पोर्टल के माध्यम से किसानों को मृदा स्वास्थ्य कार्ड दिया जाता है, जिसमें मिट्टी की पूरी जानकारी दर्ज रहती है। पाकुड़ जिले में दो-तीन प्रकार की मिट्टी पाई जाती है, ऐसे में यह जांच किसानों को उनकी मिट्टी के अनुसार सही फसल और उर्वरक चुनने में मदद कर रही है।
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